
प्रियांक खड़गे। फोटो-IANS
Chief Election Commissioner: कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने भारत के निर्वाच आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की कथित असहमति वाली चिट्ठियों का जिक्र करते हुए पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं।
मीडिया से बात करते हुए मंत्री प्रियांक ने कहा कि अगर फैसला सर्वसम्मति से हुआ था, तो असहमति की चिट्ठियां क्यों थीं? सर्वसम्मति का मतलब तो यही होता है कि सब सहमत थे, है ना? उन्होंने कहा कि तीन में से दो चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों से अलग राय रखते थे। उस पर ज्ञानेश ने अब तक क्यों जवाब नहीं दिया है। एक संवैधानिक संस्था की ओर से भाजपा नेता जवाब क्यों दे रहे हैं? उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी छूट पर भी सवाल उठाया और कहा कि अगर फैसला सर्वसम्मति से हुआ था, तो मामले की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए।
इसके साथ ही खरगे ने चुनावी सॉफ्टवेयर में कथित गड़बड़ियों व थोक में बांटे जा रहे छपे फॉर्म 7 पर भी चिंता जताई। गौरतलब बात है कि फॉर्म 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए किया जाता है। प्रियांक ने कहा कि हमने पहले से छपे इन थोक फॉर्म 7 के बंटने और इन्हें सप्लाई करने वालों के बारे में केस दर्ज करा दिए हैं। यह जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 31 से जुड़ा मामला है और हम कार्रवाई करेंगे।
वहीं, पिता व कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बाप वाले बयान पर बीजेपी के प्रदर्शन पर हमला बोला। प्रियांक ने कहा कि यह जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने उस बयान को बोलचाल की भाषा का हिस्सा बताते हुए उसका बचाव किया और भाजपा के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ पहले कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों का जिक्र किया और पूछा कि तब ऐसी आपत्तियां क्यों नहीं उठाई गईं। उन्होंने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता के लिए जताई जा रही सहानुभूति उनकी पत्नी जसोदाबेन के लिए क्यों नहीं दिखी?
प्रियांक ने आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली को लेकर बात रखी। उन्होंने कहा कि हमारे संवैधानिक कर्तव्य और जिम्मेदारियां मंत्री, कैबिनेट और निर्वाचित जनप्रतिनिधि निभाएंगे। बाकी कार्यकर्ता चाहें तो दिल्ली जा सकते हैं। इसका कर्नाटक राज्योत्सव से कोई लेना-देना नहीं है। खरगे ने यह भी जोड़ा कि कार्यकर्ता पहले कर्नाटक में समारोह में हिस्सा लेकर फिर दिल्ली जा सकते हैं, क्योंकि दोनों कार्यक्रम एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
Updated on:
27 Oct 2026, 1:13 PM IST
Published on:
27 Oct 2026, 1:13 PM IST
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