
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव एग्जिट पोल । ( फोटो: AI)
Exit Polls: पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के मतदान संपन्न होने के बाद अब एग्जिट पोल (Exit Polls) के आंकड़े सामने आ गए हैं। इन शुरुआती अनुमानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों और सर्वे एजेंसियों के मुताबिक, इस बार केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में सत्ता परिवर्तन की प्रबल संभावना है। रुझान साफ तौर पर बता रहे हैं कि एन रंगासामी के नेतृत्व वाले एनडीए ( एनडीए - जिसमें एआईएनआरसी, भाजपा और एआईएडीएमके शामिल हैं) गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिल सकता है, जबकि कांग्रेस और डीएमके के यूपीए गठबंधन को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ सकता है।
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव एग्जिट पोल: एक नजर।
देश के चार प्रमुख टीवी चैनलों और सर्वे एजेंसियों का निचोड़ एक ही दिशा में इशारा कर रहा है। 'इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया' और 'टाइम्स नॉओ-सीवोटर' के अनुमानों के अनुसार, 30 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए आसानी से 20 से 24 सीटें जीत सकता है, जो 16 सीटों के जादुई आंकड़े से काफी ज्यादा है। वहीं, 'एबीपी न्यूज़' और 'रिपब्लिक टीवी' के सर्वे ने भी एनडीए को 16 से 23 सीटों के बीच भारी बढ़त दिखाई है। दूसरी तरफ, सत्ताधारी कांग्रेस गठबंधन को महज 6 से 10 सीटों पर सिमटता हुआ दिखाया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जनता ने सत्ता विरोधी लहर और कांग्रेस की अंदरूनी कलह के खिलाफ जाकर बदलाव का वोट दिया है।
एग्जिट पोल के इन स्पष्ट आंकड़ों के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। एआईएनआरसी और बीजेपी के खेमे में भारी उत्साह है। एनडीए नेताओं का दावा है कि यह पुडुचेरी की जनता का प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और एन रंगासामी के स्थानीय नेतृत्व पर जताया गया भरोसा है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने इन सर्वेक्षणों को खारिज कर दिया है। यूपीए खेमे का कहना है कि "एग्जिट पोल असली नतीजे नहीं होते," और उन्हें पूरा विश्वास है कि मतपेटियां खुलने पर असली नतीजे उनके पक्ष में होंगे।
अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग द्वारा घोषित की जाने वाली वास्तविक मतगणना पर टिक गई हैं। एग्जिट पोल के इन भारी रुझानों के बाद बीजेपी और एआईएनआरसी ने सरकार गठन को लेकर अपनी अंदरूनी तैयारियां और बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। अगर अंतिम नतीजे इन अनुमानों के अनुरूप ही रहते हैं, तो एन रंगासामी का पुडुचेरी का अगला मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है। इसके अलावा, फालोअप के तौर पर यह भी देखा जाएगा कि हार की स्थिति में कांग्रेस अपने बचे हुए विधायकों को कैसे एकजुट रखती है।
इस पूरे चुनाव का सबसे बड़ा 'पहलू' दक्षिण भारत में भारतीय जनता पार्टी का बढ़ता प्रभाव है। पुडुचेरी में अपने दम पर और गठबंधन के सहारे सरकार बनाना, दक्षिण में कमल खिलाने की बीजेपी की बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी। कांग्रेस के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है; चुनाव से ठीक पहले जिस तरह से उनके विधायकों ने लगातार इस्तीफे दिए, उसने पार्टी की नींव हिला दी। यह चुनाव सिर्फ एक राज्य हारने का नहीं है, बल्कि यह दक्षिण भारत में कांग्रेस के लगातार सिकुड़ते जनाधार की ओर भी इशारा कर रहा है।
Updated on:
29 Apr 2026 06:40 pm
Published on:
29 Apr 2026 06:12 pm
