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Amit Shah Defamation Case: अमित शाह मानहानि केस में राहुल गांधी बरी, सुल्तानपुर कोर्ट के फैसले से मिली बड़ी राहत

Rahul Gandhi Court Case 2026: आठ साल पुराने विवाद पर अदालत का फैसला आ गया है। राजनीतिक बयानबाजी से शुरू हुआ मामला कानूनी दांव-पेच से गुजरते हुए निर्णायक मोड़ पर पहुंचा, जहां राहुल गांधी को राहत मिली।
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भारत

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Manoj Vashisth

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Updated: 26 Oct 2026, 12:07 PM IST

Amit Shah Defamation Case

Amit Shah Defamation Case : अमित शाह मानहानि केस में राहुल गांधी बरी (फोटो-ANI)

Rahul Gandhi Acquitted: सियासत में नेताओं के बयान अक्सर संसद से निकलकर अदालतों तक पहुंच जाते हैं। ऐसा ही एक मामला कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़ा था, जिसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह पर की गई टिप्पणी को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को बरी कर दिया। इस निर्णय से उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिली है।

Amit Shah Defamation Case: टिप्पणी को अदालत ने नहीं माना मानहानिकारक

सुल्तानपुर में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत ने सोमवार को राहुल गांधी को बरी करने का आदेश सुनाया। फैसले के समय कांग्रेस नेता स्वयं अदालत में मौजूद थे। न्यायालय ने मामले में पेश तथ्यों और आरोपों पर विचार करने के बाद कहा कि अमित शाह के संबंध में की गई टिप्पणी मानहानिकारक प्रकृति की नहीं थी।

यह मुकदमा भारतीय जनता पार्टी के नेता विनय मिश्रा की शिकायत पर वर्ष 2018 में दर्ज हुआ था। शिकायत में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि का आरोप लगाया गया था।

2018 की टिप्पणी से शुरू हुआ था विवाद

राहुल गांधी के खिलाफ यह मानहानि मामला वर्ष 2018 में दिए गए एक बयान से जुड़ा था। उस समय अमित शाह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ कानूनी शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता की ओर से इस बयान को मानहानिकारक बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में कानूनी दलीलें पेश की गईं और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद प्रकरण अंतिम फैसले के चरण तक पहुंचा। सोमवार को सुल्तानपुर की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने अपना निर्णय सुनाते हुए कांग्रेस नेता को आरोप से बरी कर दिया।

फैसले से राहुल गांधी को कानूनी राहत

इस निर्णय से राहुल गांधी को इस विशेष मामले में राहत मिली है। हालांकि, किसी मामले में बरी होने के कानूनी प्रभाव को समझने के लिए अदालत के विस्तृत आदेश और उसमें दर्ज निष्कर्षों को देखना महत्वपूर्ण होता है। फैसले के आधार और न्यायालय की टिप्पणियों के बारे में आधिकारिक आदेश उपलब्ध होने पर ही विस्तार से जानकारी दी जा सकती है।

राहुल गांधी देश की राजनीति में प्रमुख विपक्षी चेहरा हैं। ऐसे में उनसे जुड़े न्यायिक मामलों पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर रहती है। इस मामले में फैसला आने के बाद वर्ष 2018 की टिप्पणी से जुड़ा विवाद एक नए चरण में पहुंच गया है।

इस मुकदमे में राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा के साथ काशी शुक्ला, तरन्नुम चीमा, प्रसन्ना एस और आकाश सिंह ने पैरवी की।

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