
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (फोटो- X @@vdsatheesan)
Rajiv Gandhi assassination: 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत खो चुकी थी। वी.पी. सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार बनी, लेकिन मंडल आयोग लागू करने और बाबरी मस्जिद विवाद के कारण बीजेपी ने समर्थन वापस ले लिया। सरकार गिर गई। फिर चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने, जिन्हें कांग्रेस का बाहरी समर्थन मिला, पर वह भी जल्द टूट गया। 1991 में मध्यावधि चुनाव की घोषणा हुई। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में पूरे देश में प्रचार कर रहे थे। 21 मई 1991 की रात वह तमिलनाडु के छोटे से कस्बे श्रीपेरंबुदूर पहुंचे।
कांग्रेस ने इस सीट से मरागथम चंद्रशेखर को अपना प्रत्याशी बनाया था। राजीव गांधी 21 मई की शाम 8 बजे चेन्नई (तब मद्रास) हवाई अड्डे पर उतरे। वहां से कार में बैठकर श्रीपेरंबुदूर की ओर रवाना हुए। इस दौरान वह मद्रास के कुछ इलाकों में रुके और सभाओं को संबोधित भी किया। राजीव रात 10 बजे सभा स्थल पहुंचे। भीड़ पूर्व पीएम को लेकर उत्साहित थी। कई महिलाएं मालाएं लेकर स्वागत के लिए खड़ी थी। इन्हीं में से एक थी धनु। जिसका असली नाम थेनमोजि राजरत्नम था। वह लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) की ब्लैक टाइगर यूनिट की सदस्य थी। उसने राजीव गांधी को माला पहनाई। पैर छूने के बहाने नीचे झुकी और कमर में लगे आरडीएक्स विस्फोटक बेल्ट का स्विच दबा दिया। रात 10.21 बजे धमाके में राजीव गांधी समेत 16 लोगों की मौत हो गई और 43 लोग घायल हुए।
राजीव गांधी का शरीर उनके जूतों और घड़ी से पहचाना गया। पूर्व पीएम की हत्या की खबर देश भर में आग की तरह फैली। घटना की जांच CBI को सौंपा गई। CBI की स्पेशल टीम की कमान डी.आर. कार्तिकेयन के हाथों में थी। उनकी जांच के दौरान ही घटनास्थल से फोटोग्राफर हरिबाबू कैमरा बरामद हुआ। वह भी लिट्टे का सक्रिय कार्यकर्ता था और धमाके में मारा गया था। इस कैमरे में दर्ज तस्वीरों से पता चला कि पूर्व पीएम की हत्या की साजिश लिट्टे ने रची थी।
SIT की जांच रिपोर्ट के अनुसार, लिट्टे के प्रमुख प्रभाकरण ने पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या की साजिश रची थी। 1987 में राजीव गांधी ने श्रीलंका के साथ भारत-श्रीलंका समझौता किया था। इसके तहत भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) श्रीलंका भेजी गई थी ताकि तमिल उग्रवादी संगठनों को निरस्त्र किया जा सके। प्रभाकरण राजीव गांधी के फैसले के खिलाफ था। उसका व लिट्टे के टॉप लीडरशिप का मानना था कि यदि राजीव गांधी दोबारा सत्ता में आए तो फिर से हस्तक्षेप हो सकता है। इसलिए उन्हें खत्म करने की योजना बनाई गई।
एसआईटी के अनुसार, साजिश का आदेश जाफना से आया। शिवरासन जिसे वन-आइड जैक भी कहा जाता था इस ऑपरेशन का प्रमुख था। धनु सुसाइड बॉम्बर थी। इस साजिश में नलिनी, सुभा, मुरुगन और अन्य कई लोग भी शामिल थे। उन सभी ने पूर्व पीएम वीपी सिंह की सभा में भी इस तरह का रिहर्सल किया था ताकि घटना वाले दिन कहीं कोई चूक न हो जाए।
CBI की स्पेशल टीम की रिपोर्ट के अनुसार, 21 मई को ब्लास्ट के बाद शिवरासन और कुछ साथी भाग निकले। जांच के दौरान कई आरोपी गिरफ्तार हुए। कुछ ने साइनाइड खाकर आत्महत्या कर ली। शिवरासन भी बाद में पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को मार लिया। 1998 में विशेष अदालत ने और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने माना कि प्रभाकरण, पोट्टू अम्मन और अकिला ने साजिश रची। नलिनी समेत कई लोगों को सजा हुई।
Updated on:
20 Aug 2026 01:59 pm
Published on:
20 Aug 2026 01:23 pm
