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SBI ने 3 महीने पहले ही अफसरों को हटाने की सिफारिश की थी, राम मंदिर चंदा चोरी मामले में कांग्रेस का दावा

क्या SBI ने राम मंदिर के दान गणना केंद्र से अधिकारियों को हटाने की सिफारिश पहले ही कर दी थी? कांग्रेस के इस दावे के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। जानिए पवन खेड़ा ने क्या आरोप लगाए हैं।
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भारत

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Rahul Yadav

Jun 29, 2026

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पवन खेड़ा (फोटो सोर्स - चैट जीपीटी)

Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में गड़बड़ी के मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने दावा किया कि भारतीय स्टेट बैंक ने करीब तीन महीने पहले ही मंदिर के दान गणना केंद्र पर तैनात अधिकारियों को हटाने की सिफारिश की थी। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर ऐसी सिफारिश की गई थी तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रायपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि राम मंदिर चंदा मामले में अब तक उत्तर प्रदेश पुलिस आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है लेकिन यह केवल शुरुआत है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर चंदा गड़बड़ी का यह मामला सिर्फ एक झलक है और आगे ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं।

कांग्रेस ने सरकार से पूछे सवाल

पवन खेड़ा ने दावा किया कि SBI ने तीन महीने पहले ही दान गणना केंद्र पर तैनात अधिकारियों को हटाने की सिफारिश की थी। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इन अधिकारियों को किसका संरक्षण मिल रहा था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर प्रशासन की निगरानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री कार्यालय के स्तर पर हो रही थी। खेड़ा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछा कि अगर इस मामले में गड़बड़ी हुई है तो क्या बुलडोजर कार्रवाई RSS या PMO तक भी पहुंचेगी।

बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार किया

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के साथ-साथ अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

मौर्य ने कहा, "अखिलेश यादव ऐसे परिवार से आते हैं जिसने हमेशा भगवान राम का विरोध किया। उनके पिता की सरकार में रामभक्तों पर गोलियां चली थीं। उन्होंने खुद भी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन नहीं किए।"

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को आस्था से जुड़ा बताते हुए कहा कि यह करोड़ों सनातनियों की श्रद्धा का विषय है। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और जनता की अदालत में भी इस मामले पर फैसला हो रहा है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि इस मामले में बड़े लोगों की भूमिका की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

रामदास आठवले बोले- सरकार ने तुरंत कार्रवाई की

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मामला सामने आते ही जांच के आदेश दिए, एफआईआर दर्ज कराई और कई लोगों को गिरफ्तार किया।

उन्होंने कहा कि संबंधित सचिव और अध्यक्ष ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आठवले ने कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने में किसी तरह का भेदभाव नहीं करती और दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

महुआ मोइत्रा ने भी साधा निशाना

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा अब इस मामले पर जवाब देने से बच रही है। उन्होंने कहा कि देश इस मामले पर जवाब चाहता है।

VHP ने वकीलों के फैसले पर जताई आपत्ति

इस बीच, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या बार एसोसिएशन के उस प्रस्ताव पर सवाल उठाया, जिसमें आरोपियों की पैरवी नहीं करने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि सबसे गंभीर अपराध के आरोपी को भी अपना पक्ष रखने और कानूनी बचाव का अधिकार मिलना चाहिए। उनके अनुसार, बार एसोसिएशन का यह प्रस्ताव राजनीतिक प्रतीत होता है।

क्या है पूरा मामला?

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान और कीमती सामान में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। शुरुआती जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ये सभी दान की गिनती और रिकॉर्ड से जुड़े कार्यों में लगे थे।

पुलिस अब तक लगभग 79.85 लाख रुपये बरामद कर चुकी है। मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति रखने, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत जारी है।