
प्रदर्शन के दौरान पंजाब कांग्रेस के नेताओं के साथ सचिन पायलट (फोटो-IANS)
Sachin Pilot Punjab Congress : नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से जारी अंदरूनी खींचतान के बीच चंडीगढ़ से पार्टी के लिए एकजुटता की तस्वीर सामने आई है। कांग्रेस आलाकमान की ओर से पंजाब का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद सचिन पायलट सक्रिय नजर आ रहे हैं। चंडीगढ़ में मंगलवार को गुलजार सिंह की मौत के मामले में पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत पार्टी के प्रमुख नेताओं को एक ही मंच पायलट के साथ नजर आए।
काफी समय से अलग-अलग खेमों में नजर आ रहे इन नेताओं की एक साथ तस्वीर सामने आने के बाद पंजाब कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी इसे संगठन में एकजुटता की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सचिन पायलट के राजनीतिक सफर में राजस्थान का अनुभव अहम माना जाता है। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महज 21 सीटों पर सिमट गई थी। इसके बाद पायलट को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। पायलट ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर जोर दिया। करीब पांच साल तक उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया और तत्कालीन भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस के अभियान को मजबूत किया। इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की और पायलट को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली।
राजस्थान के बाद कांग्रेस संगठन ने पायलट को दूसरे राज्यों में भी जिम्मेदारियां दीं। छत्तीसगढ़ में 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें पार्टी का प्रभारी महासचिव बनाया गया। उन्होंने वहां संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ काम किया। केरल में भी कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें चुनावी गतिविधियों और संगठन से जुड़े कार्यों में जिम्मेदारी दी। राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की जीत के बाद पार्टी के भीतर पायलट की संगठनात्मक भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ी।
पंजाब कांग्रेस में कई वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद पार्टी के लिए लंबे समय से चुनौती रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा जैसे नेताओं के अलग-अलग राजनीतिक प्रभाव हैं। ऐसे में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन नेताओं के बीच बेहतर समन्वय कायम करने और संगठन को चुनावी मोड में लाने की होगी। 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं को एक मंच पर लाकर सामूहिक रूप से चुनाव की तैयारी करने की है।
Updated on:
17 Sept 2026 01:13 pm
Published on:
17 Sept 2026 12:29 pm
