सद्गुरु ने कहा, “राष्ट्र कमजोरी पर नहीं टिकते। चिकन बनकर कोई देश नहीं चलता। उसे हाथी बनना होता है। चाहे इसके लिए पोषण चाहिए या स्टेरॉयड, जो भी जरूरी हो, वह करना होगा। हर प्रयास की एक कीमत होती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर सीमाहीन दुनिया का विचार अच्छा लग सकता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह व्यावहारिक नहीं है। दुनिया अभी ऐसी स्थिति में नहीं है जहां सीमाओं के बिना सब एक साथ रह सकें।