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मुरेठा बांधकर CM नीतीश को पद से हटाने की खाई थी कसम, बाद में सम्राट चौधरी ने उतार दी पगड़ी, सफाई में क्या कहा?

बिहार की सियासत में कहते हैं कि यहां कल का दुश्मन आज का साथी बन जाता है। सम्राट चौधरी की कहानी इसी बात की सबसे बड़ी मिसाल है। जिस नीतीश कुमार को सीएम पद से हटाने की कसम खाकर उन्होंने सिर पर मुरैठा बांधी थी, आज उन्हीं के आशीर्वाद से वो बिहार के मुख्यमंत्री बनने […]

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पटना

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Mukul Kumar

Apr 14, 2026

मुरेठा में सम्राट चौधरी। (फोटो- IANS)

बिहार की सियासत में कहते हैं कि यहां कल का दुश्मन आज का साथी बन जाता है। सम्राट चौधरी की कहानी इसी बात की सबसे बड़ी मिसाल है।

जिस नीतीश कुमार को सीएम पद से हटाने की कसम खाकर उन्होंने सिर पर मुरैठा बांधी थी, आज उन्हीं के आशीर्वाद से वो बिहार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्राट चौधरी के नाम का एलान किया। बिहार को उसका 24वां मुख्यमंत्री मिल गया।

वो मुरैठा जिसने बदल दी सियासत की दिशा

जब नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़कर राजद के साथ हाथ मिलाया, तो सम्राट चौधरी ने सबके सामने सिर पर मुरैठा बांध ली। उन्होंने साफ कह दिया कि जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर हैं, तब तक यह पगड़ी नहीं उतरेगी।

विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने नीतीश सरकार को जमकर घेरा। यही वो दौर था जब बिहार की भाजपा में सम्राट चौधरी का नाम सबसे ऊंचा हुआ। लेकिन राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता। जब 2024 में नीतीश कुमार एनडीए में वापस लौटे, तो सम्राट ने भी मुरैठा उतार दी और उपमुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल ली।

सफाई में सम्राट ने क्या कहा?

सम्राट चौधरी ने 3 जुलाई 2024 को अयोध्या में सरयू नदी के तट पर मुरैठा (पगड़ी) उतारने के बाद सफाई दी। उन्होंने कहा- मैंने 28 जनवरी को पटना में ही घोषणा कर दी थी कि एनडीए की सरकार बनने के बाद अयोध्या जाकर प्रभु श्री राम के चरणों में अपना मुरैठा समर्पित करूंगा। आज मैंने उस संकल्प को पूरा कर दिया है।

राजनीति विरासत में मिली, लेकिन रास्ता खुद बनाया

सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी बिहार के दिग्गज नेता रहे हैं। सात बार विधायक और सांसद रह चुके शकुनी चौधरी लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते थे।

माता पार्वती देवी भी तारापुर से विधायक रह चुकी हैं। घर में राजनीति का माहौल था, इसलिए सम्राट ने भी जल्दी ही इस दुनिया में कदम रख दिया।

1990 में सक्रिय राजनीति में आए और 19 मई 1999 को महज 19 साल की उम्र में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बन गए। हालांकि बाद में उम्र को लेकर विवाद हुआ और उन्हें बर्खास्त भी किया गया, लेकिन सम्राट ने हार नहीं मानी।

राजद से भाजपा तक का लंबा सफर

सम्राट चौधरी ने अपनी राजनीति की शुरुआत राजद से की। 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से जीते। 2010 में विपक्षी दल के मुख्य सचेतक बने। 2014 में जब नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया, तो सम्राट उस सरकार में भी मंत्री रहे।

2018 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा। 2023 में वो बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने और तभी से सीएम की रेस में उनका नाम सबसे आगे चला आ रहा था।

नीतीश ने जो पहले कभी नहीं किया, वो सम्राट के लिए किया

2025 के विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए की सरकार बनी तो नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री के साथ गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दे दी। यह इसलिए बड़ी बात थी क्योंकि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए पहली बार गृह मंत्रालय किसी और को सौंपा था। राजनीतिक जानकार उसी दिन समझ गए थे कि नीतीश अपना उत्तराधिकारी तय कर चुके हैं।

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