
आजसू प्रमुख सुदेश महतो (फोटो- Sudesh mahto FB)
JPSC-JSSC Protest: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ युवाओं का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। शनिवार को ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने आंदोलनकारी उम्मीदवारों को अपना पूरा समर्थन दिया। महतो ने कहा कि प्रशासन ने राज्य की संवैधानिक और पारदर्शी भर्ती संस्थाओं को नौकरी बेचने का अड्डा बना दिया है।
AJSU अध्यक्ष सुदेश महतो ने कहा कि छात्र किसी मामूली बात पर सड़कों पर नहीं उतरे हैं। बल्कि, यह झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है। महतो ने सभी से आग्रह किया कि वे इस मामले को हल्के में न लें, बल्कि इसकी गंभीरता को समझें।
सुदेश महतो ने कहा कि मुख्य मुद्दा छात्रों की मांगों और उनके विरोध के कारणों को समझना है। इसका जवाब सीधा है कि राज्य सरकार की भर्ती एजेंसियों को नौकरी बेचने का अड्डा बना दिया गया था। उम्मीदवारों का यह आरोप पूरी तरह सही है कि इन आयोगों में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने युवाओं के भविष्य का सौदा किया है।
उम्मीदवारों की मुख्य मांगों से सहमति जताते हुए, सुदेश महतो ने राज्य सरकार से बिना देरी किए सख्त कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब तक आयोगों में ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को हटाया नहीं जाता, तब तक निष्पक्ष जांच असंभव है। महतो ने कहा कि इन आयोगों में संबंधित क्षेत्रों के योग्य विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाना चाहिए और राजनीतिक जुड़ाव या निष्ठा रखने वाले लोगों को ऐसे संवैधानिक और प्रशासनिक निकायों से सख्ती से दूर रखा जाए। अब अंतिम फैसला सरकार को करना है।
शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के बाद सुदेश महतो भावुक और दृढ़ दिखे। झारखंड आंदोलन के अगुआ शहीद निर्मल महतो के विन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि शोषण मुक्त झारखंड का सपना रोज बिखरता जा रहा है।
AJSU प्रमुख ने कहा कि स्मारक पर आने से उन संकल्पों को फिर से दोहराने का मौका मिला। निर्मल दा ने 'शोषण मुक्त राज्य' की कल्पना की थी। उन्होंने सिर्फ राज्य की भौगोलिक सीमाएं तय करने के बारे में नहीं सोचा था। वे एक ऐसे क्षेत्र की कामना करते थे जहां का समाज शोषण से मुक्त हो। दुर्भाग्य से आज राज्य सरकार के नेतृत्व में हर जगह शोषण और दमन का माहौल है। वैचारिक स्पष्टता की कमी के कारण, आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले लोग अब राजनीतिक सफलता के बावजूद सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं।
Updated on:
08 Aug 2026 06:33 pm
Published on:
08 Aug 2026 06:29 pm
