
20 जुलाई को CJP ने संसद चलो मार्च का किया था आयोजन (Photo-IANS)
Supreme Court Delhi Protest: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि 20 जुलाई को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इन्क्वायरी कमेटी (HPEC) को अपनी स्वतंत्र जांच करने का अवसर दिया जाना चाहिए। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि समिति चाहे जो भी कार्रवाई करे, वह सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी। हमने मामला खत्म नहीं किया है और हम हर चीज की निगरानी करेंगे।
बता दें कि आवेदन पर की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने मंगलवार को सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी को सौंपी गई थी।
समिति को प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए पुलिस ज्यादती के आरोपों के साथ-साथ पुलिसकर्मियों के घायल होने और प्रदर्शनकारियों द्वारा संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने संबंधी आरोपों की भी जांच करनी है।
समिति के अन्य सदस्यों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व DGP एलआर बिश्नोई शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट में आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए। उन्होंने पीठ सेआवेदन को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने आवेदन की मंशा पर सवाल उठाया। तुषार ने इसे बहुत शरारती आवेदन बताया और कहा कि इसे मुख्य मामले के साथ ही सुना जाना चाहिए।
तुषार मेहता ने कहा कि समिति के पुनर्गठन के लिए कुछ नाम सुझाए गए हैं और मामले को राजनीतिक मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
CJI सूर्यकांत ने भी आवेदन में नामों का उल्लेख किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अदालत ऐसे नामों के उल्लेख को पसंद नहीं करती। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता शंकरनारायणन ने स्पष्ट किया कि उनका आग्रह केवल आवेदन को सूचीबद्ध करने तक सीमित है और सुनवाई के दौरान भी वह किसी का नाम नहीं लेना चाहते।
सुप्रीम कोर्ट में पीठ ने कहा कि समिति के पुनर्गठन की मांग वाले आवेदन पर मुख्य याचिकाओं के साथ सुनवाई की जाएगी। मुख्य याचिकाओं में CJP प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती और उससे जुड़े अन्य मुद्दे उठाए गए हैं।
बता दें कि नीट पेपर लीक, परीक्षाओं में अनियमितता और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुए थे।
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और प्रदर्शन समाप्त कर दिए गए।
बिहार में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हुआ। एक वीडियो में एक पुलिसकर्मी को प्रदर्शनकारियों की ओर AK-47 जैसी राइफल ताने हुए भी देखा गया था। इन घटनाओं के बाद पुलिस कार्रवाई और कथित ज्यादती को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं।
Updated on:
25 Aug 2026 01:56 pm
Published on:
25 Aug 2026 01:54 pm
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