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चंद्रिमा भट्टाचार्य पर भड़के TMC सांसद सौगत रॉय, बोले- अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, ममता बनर्जी से किया विश्वासघात

TMC की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद पार्टी में विवाद बढ़ गया है। सांसद सौगत रॉय ने उन पर ममता बनर्जी का भरोसा तोड़ने और अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाने का आरोप लगाया।
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TMC MP Saugata Roy

टीएमसी सांसद सौगता रॉय (फोटो- एएनआई)

Saugata Roy Statement: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने उन पर हमला बोला है। सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और ममता बनर्जी के भरोसे को तोड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर उनके रवैये को लेकर नाराजगी थी, इसलिए उनके इस्तीफे के समय किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की।

सौगत रॉय ने लगाए भरोसा तोड़ने के आरोप

सौगत रॉय ने कहा कि चंद्रिमा भट्टाचार्य राज्य की TMC प्रेसिडेंट थीं। बाहरी लोग आए और ऑफिस पर कब्जा करने की कोशिश की। उस समय चंद्रिमा भट्टाचार्य ऑफिस में थीं, लेकिन उन्होंने इस पर कोई एतराज़ नहीं किया। उन्होंने ऐसा न करके गलत किया। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की। इसलिए पार्टी के अंदर लोगों में गुस्सा था। उन्होंने आगे कहा कि वह खुद पार्टी छोड़कर चली गईं। हमने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। ममता बनर्जी ने उन्हें कई पद दिए थे। एक चुनाव हारने के बाद भी उन्हें दूसरी सीट से जिताकर वापस लाया गया, लेकिन उन्होंने भरोसा तोड़ा।

पार्टी दफ्तर को लेकर बढ़ा विवाद

चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब टीएमसी के राज्य कार्यालय को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। कोलकाता में पार्टी के राज्य कार्यालय की इमारत के मालिक ने अंदर से दफ्तर में ताला लगा दिया। यह कदम उस समय उठाया गया, जब खबरें सामने आईं कि नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला एक बागी गुट दफ्तर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा था। इस घटना के बाद पार्टी के भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई।

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने इस्तीफे में सभी जिम्मेदारियां छोड़ीं

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपना इस्तीफा सीधे ममता बनर्जी को भेजा। अपने पत्र में उन्होंने बताया कि जून 2026 में उन्हें जो राज्य अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी, उससे वह इस्तीफा दे रही हैं। उन्होंने पार्टी के सभी अन्य पदों से भी इस्तीफा देने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने खुद को भारत निर्वाचन आयोग के सामने ममता बनर्जी की अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में भी वापस ले लिया।

अपने पत्र में उन्होंने लिखा, मैं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा देती हूं साथ ही, मैं उन सभी अन्य पदों से भी इस्तीफा देती हूं जिन पर मैं अभी काम कर रही हूं। कृपया ध्यान दें कि मैं अलग-अलग बैंकों में मौजूद खातों के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के तौर पर अपना नाम वापस ले रही हूं और भारत के चुनाव आयोग के सामने आपके अधिकृत प्रतिनिधि के तौर पर भी अपना नाम वापस ले रही हूं।

'कालीघाट तृणमूल के भीतर काम करने का माहौल नहीं बचा'

चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे पर पार्टी से निष्कासित TMC विधायक संदीपन साहा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए दावा किया कि कालीघाट तृणमूल के भीतर काम करने का माहौल अब नहीं बचा था। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पूरे विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राज्य अध्यक्ष के इस्तीफे और उसके बाद नेताओं के सार्वजनिक बयानों ने यह साफ कर दिया है कि TMC के भीतर चल रहा विवाद अब खुलकर राजनीतिक संकट का रूप लेता दिखाई दे रहा है।