
उद्धव ठाकरे(फोटो-IANS)
Uddhav Thackeray On Party Split: मुंबई के भांडुप में आयोजित एक बड़ी जनसभा के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बागी नेताओं और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। यह रैली ऐसे इलाके में हुई जिसे बागी सांसद संजय दिना पाटिल का मजबूत क्षेत्र माना जाता है। मंच से बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जोश भरने की कोशिश की और कहा कि उनके सामने सिर्फ शिवसैनिक नहीं, बल्कि संघर्ष की प्रतीक जलती हुई मशालें खड़ी हैं। ठाकरे ने बताया कि पार्टी स्थापना दिवस पर उन्होंने जो संकल्प लिया था, अब उसे जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां पार्टी के नेताओं ने जनता का भरोसा तोड़ा है, वहां वह स्वयं जाकर मतदाताओं से माफी मांग रहे हैं।
उद्धव ठाकरे ने स्वीकार किया कि जिन सांसदों ने बाद में पार्टी छोड़ी, उन्हें उम्मीदवार बनाना उनकी राजनीतिक भूल थी। उन्होंने कहा कि लोगों ने उन नेताओं को उनके व्यक्तिगत नाम पर नहीं, बल्कि शिवसेना और उसके चुनाव चिह्न पर भरोसा करके जिताया था। ऐसे में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की जिम्मेदारी के साथ-साथ उम्मीदवार चुनने की गलती की नैतिक जिम्मेदारी भी उनकी है।
बीजेपी पर हमला बोलते हुए ठाकरे ने कहा कि शिवसेना को कमजोर करने और तोड़ने की कोशिशें लंबे समय से की जाती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के साथ दशकों तक राजनीतिक संघर्ष रहने के बावजूद उसने कभी शिवसेना को खत्म करने या उसके नेताओं को तोड़ने की कोशिश नहीं की। इसके विपरीत बीजेपी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा शिवसेना को नुकसान पहुंचाने की रणनीति अपनाई। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब बीजेपी राजनीतिक रूप से काफी कमजोर थी और शिवसेना ने उसका साथ देकर उसे मजबूत बनाया। ठाकरे का दावा था कि आज जो पार्टी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों में गिनी जाती है, उसके विस्तार में शिवसेना की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
रैली के दौरान उद्धव ठाकरे ने बिना नाम लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कोई बाहरी व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि शिवसेना का असली नेतृत्व किसके हाथ में होगा। उनके मुताबिक शिवसेना की पहचान बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से जुड़ी है और पार्टी का नेतृत्व उसी परंपरा के अनुसार तय होगा।
बागी सांसदों पर कटाक्ष करते हुए ठाकरे ने कहा कि पद, गाड़ी या सत्ता का प्रभाव खरीदा जा सकता है, लेकिन समर्पित और वफादार कार्यकर्ता नहीं खरीदे जा सकते। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पार्टी ने इन नेताओं को अवसर नहीं दिया होता तो क्या वे आज उस मुकाम तक पहुंच पाते जहां वे हैं।
Updated on:
21 Jun 2026 11:33 pm
Published on:
21 Jun 2026 11:11 pm
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