
Waqf Amendment Bill: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा के दौरान 2013 में किए गए वक्फ कानून संशोधन को तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर वक्फ बोर्ड और परिषद में केवल एक धर्म के लोगों की नियुक्ति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि इससे देश को विभाजित करने की कोशिश की गई। शाह ने यह भी कहा कि नए विधेयक की आवश्यकता 2013 में किए गए संशोधन की वजह से पड़ी।
अमित शाह ने कहा कि वक्फ बोर्ड और परिषद का कार्य इन संपत्तियों को बेईमानी से हड़पने वाले लोगों को पकड़ना और उन्हें बाहर निकालना है। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आमदनी लगातार गिर रही है क्योंकि संपत्तियों को अवैध रूप से सौ-सौ साल तक के लिए किराए पर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस विधेयक के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय का विकास करना और इस्लाम धर्म की धार्मिक संस्थाओं को अधिक मजबूत करना है।
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि 2014 के आम चुनावों से पहले, 2013 में वक्फ कानून को "एक्सट्रीम" बना दिया गया था। इसके चलते दिल्ली के लुटियन्स जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां कांग्रेस सरकार ने चुनाव से 25 दिन पहले वक्फ को सौंप दी थीं। उन्होंने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया और कहा कि यदि 2013 में संशोधन नहीं किया जाता, तो आज इस नए विधेयक की जरूरत नहीं पड़ती।
अमित शाह ने विपक्षी सांसदों के इस आरोप को खारिज कर दिया कि यह विधेयक मुसलमानों की संपत्तियों को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि वास्तव में विपक्ष ही अल्पसंख्यकों को भ्रमित कर रहा है और वोट बैंक की राजनीति कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ परिषद और बोर्ड की स्थापना 1995 में हुई थी और इसका उद्देश्य धार्मिक कार्यों का संचालन नहीं, बल्कि दान की गई संपत्तियों का प्रशासन करना है।
गृह मंत्री ने समझाया कि 'वक्फ' एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ 'अल्लाह के नाम पर पवित्र संपत्तियों का दान देना' है। यह प्रणाली दिल्ली सल्तनत काल से अस्तित्व में है और बाद में ब्रिटिश काल में इसे कानूनी रूप दिया गया। 1954 में इसे केंद्रीकृत किया गया और 1995 में वक्फ अधिकरण और वक्फ बोर्डों की स्थापना की गई। शाह ने कहा कि वक्फ बोर्डों का कार्य धार्मिक नहीं बल्कि प्रशासनिक है और ट्रस्टी किसी भी धर्म के हो सकते हैं।
अमित शाह ने कहा कि पहले के प्रावधानों के तहत वक्फ में कोई गैर-इस्लामिक सदस्य नहीं हो सकता था। उन्होंने बताया कि नया विधेयक वक्फ की संपत्तियों के सही प्रशासन पर केंद्रित है और इसमें धार्मिक हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों पर अल्पसंख्यकों को डराने और उनके वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया।
Updated on:
02 Apr 2025 09:24 pm
Published on:
02 Apr 2025 07:10 pm
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