
90 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे (AI PhotoI
SIR Impact In West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार वोटर लिस्ट सबसे बड़ा मुद्दा बन गई। चुनाव से पहले स्पेशल रिवीजन (SIR) के दौरान करीब 90 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे और नतीजों ने सीधे सत्ता बदल दी। SIR को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने कई सवाल उठाए थे। लेकिन नतीजों में साफ दिखा कि जिन सीटों पर ज्यादा नाम कटे, वहां बीजेपी को बड़ा फायदा मिला। 147 ऐसी सीटों में BJP ने 95 पर जीत दर्ज की। मुर्शिदाबाद और नॉर्थ 24 परगना जैसे इलाकों में तृणमूल को भारी नुकसान हुआ। जिससे बंगाल में 15 साल पुरानी सरकार सत्ता से बाहर हो गई और BJP ने बड़ी जीत हासिल की।
चुनाव से पहले राज्य में बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। यह प्रक्रिया चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत की गई थी। आयोग का कहना था कि इसमें मृत और डुप्लिकेट वोटरों को हटाया गया है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया।
आंकड़े साफ दिखाते हैं कि जिन सीटों पर ज्यादा नाम हटे, वहां बीजेपी को सीधा फायदा हुआ। 15 हजार से 25 हजार नाम हटने वाली 67 सीटों में BJP ने 47 सीटें जीतीं। तृणमूल को सिर्फ 19 सीटें मिलीं, कांग्रेस को केवल 1 सीट मिली। 5 हजार से 15 हजार नाम हटने वाली 62 सीटों में BJP ने 50 सीटें अपने नाम कीं। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिन 13 सीटों पर 5 हजार से कम नाम हटे, वहां भी BJP ने सभी सीटें जीत लीं।
कुल 147 ऐसी सीटें थीं जहां 25 हजार से ज्यादा नाम हटाए गए। इनमें से BJP ने 95 सीटों पर जीत दर्ज की। तृणमूल को 51 सीटें मिलीं और कांग्रेस केवल एक सीट तक सिमट गई। मतदाता सूची में सबसे ज्यादा नाम मुर्शिदाबाद जिले से हटाए गए। यहां 4.55 लाख से ज्यादा नाम काटे गए। इसका असर सीधे नतीजों पर दिखा 2021 में तृणमूल ने 22 में से 20 सीटें जीती थीं। लेकिन इस बार यह संख्या घटकर सिर्फ 9 रह गई नॉर्थ 24 परगना और मालदा में भी बड़ा बदलाव नॉर्थ 24 परगना में भी तृणमूल को बड़ा नुकसान हुआ 2021 में 33 में से 28 सीटें जीती थीं वहीं इस बार सिर्फ 8 सीटों पर सिमट गई। मालदा में भी तृणमूल की स्थिति कमजोर हुई पहले 12 में से 8 सीटें थीं, अब घटकर 6 रह गईं। बाकी सीटों पर BJP ने कब्जा किया।
बंगाल की 2200 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। ऐसे में चुनाव आयोग ने SIR के जरिए अवैध और संदिग्ध नामों की पहचान करने की बात कही। इस प्रक्रिया में रिकॉर्ड 91 लाख मतदाता अयोग्य पाए गए।
इस चुनाव ने साफ कर दिया कि अब सिर्फ वोटिंग ही नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट भी चुनावी रणनीति का बड़ा हिस्सा बन चुकी है। तृणमूल जहां इसे साजिश बता रही है, वहीं बीजेपी इसे साफ-सुथरी प्रक्रिया कह रही है। लेकिन नतीजे बताते हैं कि जहां-जहां नाम कटे, वहां सत्ता भी बदली।
Published on:
05 May 2026 06:32 pm
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