गृह मंत्रालय ने इस घटना को गंभीर मानते हुए इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत “अनुसूचित अपराध” माना है। मंत्रालय का कहना है कि विस्फोटकों का अवैध भंडारण न केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि इसका उद्देश्य दहशत फैलाना भी हो सकता है।