
West Bengal Murshidabad
Murshidabad Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दोनों चरणों में मतदान संपन्न हो चुका है। पहले चरण में राज्य भर में 93.19 प्रतिशत बंपर वोटिंग दर्ज की गई, लेकिन मुर्शिदाबाद जिला एक बार फिर कानून-व्यवस्था की दृष्टि से सबसे संवेदनशील केंद्र बना रहा। निर्वाचन आयोग ने यहां भारी सुरक्षा इंतजाम किए। जंगीपुर और मुर्शिदाबाद को मिलाकर केंद्रीय बलों की 316 कंपनियां तैनात की गईं, जो पूरे राज्य में सबसे अधिक हैं। आज वोटों की गिनती के बाद साफ हो जाएगा कि क्या TMC के गढ़ में बीजेपी अपना कमल खिला पाती है या नहीं, या फिर हुमायूं कबीर अपना झंडा लहराते हैं।
मुर्शिदाबाद जिले की 22 विधानसभा सीटें बंगाल की राजनीति में 'किंगमेकर' की भूमिका निभाती हैं। यहां करीब 66-67.7 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गढ़ रहा है। 2021 में TMC ने इन 22 सीटों में से 20 पर जीत हासिल की थी। हालांकि, इस बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत 4 लाख से अधिक नाम वोटर लिस्ट से कटने से सियासी समीकरण प्रभावित होने की आशंका है।
इस सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा के वर्तमान विधायक गौरी शंकर घोष और TMC की शओनी सिंघा रॉय के बीच है। गौरी शंकर घोष 2021 में मात्र 2,491 वोटों (लगभग 1%) के अंतर से TMC की शओनी सिंघा रॉय को हराकर विजयी हुए थे। शओनी सिंघा रॉय पहले कांग्रेस से जुड़ी रहीं और 2011 तथा 2016 में इस सीट पर जीत चुकी हैं। कांग्रेस ने सिद्दीकी अली और वाम मोर्चा की ओर से AIFB ने अब्दुल मन्नान को मैदान में उतारा है।
इस बीच, आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर (नौदा क्षेत्र से उम्मीदवार) ने मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे है। बाबरी मस्जिद जैसी संरचना बनाने के उनके ऐलान ने सुर्खियां बटोरीं। TMC से निलंबित होने के बाद अपनी पार्टी बनाकर कबीर मुर्शिदाबाद में मुस्लिमों के बड़े नेता बनने की जुगत में हैं।
मतदान के दिन नौदा विधानसभा क्षेत्र में हुमायूं कबीर को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थानीय TMC कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले को घेर लिया, 'गो बैक' के नारे लगाए और पथराव किया। लाठी-डंडों से हमला भी हुआ। केंद्रीय बलों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला। एक दिन पहले कच्चे बम फेंके जाने की घटना से इलाका पहले से तनावपूर्ण था। कबीर ने आरोप लगाया कि TMC उनके मुस्लिम समर्थकों को डरा रही है, जबकि TMC ने इनकार किया।
मुर्शिदाबाद सीट का इतिहास विविध रहा है। 1950 के दशक में कांग्रेस का दबदबा था। 1977 के बाद AIFB (वाम मोर्चा) की पकड़ बनी। 2011-16 में कांग्रेस के साथ TMC गठबंधन में शओनी सिंघा रॉय ने जीत हासिल की। 2021 में BJP ने उलटफेर किया। मुर्शिदाबाद, सागरदिघी, रानीनगर, जंगीपुर और फरक्का जैसी सीटें कांटे की टक्कर वाली मानी जा रही हैं। अधीर रंजन चौधरी का पारंपरिक प्रभाव भी यहां दिखता है।
विश्लेषक मानते हैं कि मुर्शिदाबाद का वोटिंग पैटर्न पूरे बंगाल के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। मुस्लिम वोटों का बंटवारा, SIR का असर और केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बीच यह चुनाव बंगाल की सियासी दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
Published on:
04 May 2026 06:13 am
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