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India Economy Report: वैश्विक व्यापार में बदलाव, निवेश के नए रुझानों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की आर्थिक भूमिका मजबूत हो रही है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का बढ़ता मुक्त व्यापार समझौता नेटवर्क 2035 तक देश की GDP में 140 से 170 अरब डॉलर तक का योगदान कर सकता है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री टॉम ऑरलिक के मुताबिक, दुनिया में पूंजी का प्रवाह बदल रहा है, भू-राजनीतिक मतभेदों के कारण व्यापार के रास्ते बंट रहे हैं और AI विभिन्न उद्योगों की कार्यप्रणाली बदल रहा है। ऐसे माहौल में भारत विकास की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का बढ़ता मुक्त व्यापार समझौता नेटवर्क देश के निर्यात के लिए नए अवसर खोल सकता है। इससे 2035 तक GDP में 140 से 170 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत विनिर्माण की लागत घटाने के लिए घरेलू सुधारों को आगे बढ़ाता है और कृषि क्षेत्र से श्रमिकों को अधिक उत्पादक कामों की ओर ले जाने में सफल रहता है, तो व्यापार से होने वाला आर्थिक लाभ और बढ़ सकता है।
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, AI भारत की GDP वृद्धि दर में सालाना 0.9 प्रतिशत तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी चेताया कि बुनियादी ढांचे से जुड़ी सीमाएं AI से मिलने वाले लाभ को कम कर सकती हैं। भारत का IT सेवा क्षेत्र इस बदलाव से अवसर और चुनौती, दोनों का सामना कर रहा है। AI भारतीय कंपनियों को अधिक मूल्यवर्धित सेवाएं देने में मदद कर सकता है, लेकिन ऑटोमेशन से श्रम लागत के आधार पर मिलने वाला प्रतिस्पर्धी लाभ भी प्रभावित हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में पूंजी का प्रवाह अब पहले से अधिक चुनिंदा और राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित हो रहा है। प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच पूंजी का प्रवाह सहयोगी देशों की तुलना में करीब 40 प्रतिशत कम रहने का अनुमान दिया गया है। निवेश का बड़ा हिस्सा AI और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों की ओर जा रहा है। ऐसे में भारत के लिए जरूरी होगा कि वह अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र की मांग और दूसरे देशों में निवेश आकर्षित करने के लिए दी जा रही प्रोत्साहन योजनाओं के बीच अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति बनाए रखे।
Published on:
13 Oct 2026 01:00 am
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