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दिल्ली अग्निकांड: किर्गिस्तान से इलाज कराने आई थी नरगीसा, बेटे ने लिवर देकर दी थी मां को नई जिंदगी, पर हादसे ने ली दोनों की जान

दिल्ली अग्निकांड ने किर्गिस्तान की 53 साल की नरगीसा खान और उनके बेटे हुमायूं की जान ले ली है। नरगीसा लिवर ट्रांसप्लांट के इलाज के लिए दिल्ली आई थीं और जल्द ही अपने देश लौटने वाली थीं।

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Delhi Fire Tragedy

हुमायूं की चचेरी बहन और मृतक नरगिस खान की रिश्तेदार गुजल (Photo-IANS/Sanpgrab)

Delhi Fire Tragedy: साउथ दिल्ली के होटल अग्निकांड के बाद लगातार दर्दनाक कहानियां सामने आ रही हैं। आपको बता दें कि 3 जून को दिल्ली के फ्लोरिश स्टे होल में भीषण आग लगी थी जिसमें 21 लोगों की जान चली गई है। इसी हादसे में किर्गिस्तान की 53 साल की नरगीसा खान की भी मौत हुई है जो दिल्ली में अपना लिवर ट्रांसप्लांट कराने आई थीं। ऑपरेशन होने के बाद वह अपने देश वापस लौटने वाली थी लेकिन उससे पहले ही इस हादसे में उनकी और उनके बेेटे की जान ले ली।

बेटे ने डोनेट किया था लिवर

नरगीसा खान लंबे समय से लिवर सिरोसिस की बीमारी से जूझ रही थीं। उनकी हालत को देखते हुए बेटे हुमायूं ने मां की जान बचाने के लिए लिवर डोनेट करने का फैसला लिया। पिछले महीने दिल्ली के मैक्स अस्पताल में दोनों की सर्जरी हुई और ऑपरेशन सफल भी रहा। हुमायूं की चचेरी बहन गुजल ने बताया कि इस सर्जरी के सफल होने पर परिवार में सब खुश थे। वह दोनों अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद पूरी तरह ठीक होने के लिए फ्लोरिश स्टे होटल में तीसरे फ्लोर पर रुके हुए थे। उन्होंने बताया कि 8 जून को किर्गिस्तान लौटने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया।

हादसे वाली सुबह नरगीसा ने किया था फोन

गुजल ने बताया कि हादसे वाली सुबह करीब 8:53 बजे नरगीसा का फोन आया था। फोन पर वह काफी घबराई हुई थीं। उन्होंने बस इतना कहा कि होटल में आग लग गई है। इसके तुरंत बाद कॉल कट गई। गुजल ने कई बार दोबारा फोन मिलाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब वह मौके पर पहुंचीं तो पुलिसकर्मियों से बार-बार अपने परिवार के लोगों को बाहर निकालने की बात कहती रहीं। काफी देर बाद जब शवों को बाहर लाया गया, तो उनमें हुमायूं और नरगीसा का शव भी शामिल था।

गुरुग्राम में एक परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

आपको बता दें इस हादसे में गुरुग्राम के रहने वाले सीए विवेक अग्रवाल के परिवार के 8 सदस्यों की जान चली गई है। विवेक की पत्नी तरजनी अग्रवाल, उनकी दोनों बेटियां, मां और अन्य रिश्तेदार भी होटल में ठहरे हुए थे। असल में विवेक के पिता की तबीयत खराब थी और उनका इलाज भी मैक्स हॉस्पिटल से चल रहा था और पूरा परिवार उनसे मिलने के लिए आया था। तरजनी के पिता प्रेम बंसल ने बताया कि हादसे वाली सुबह उनकी बेटी से आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने बताया कि मैंने उसे फोन करके कहा था कि मैंने बच्चों के लिए मैकरोनी और उसके लिए परांठे बनाए हैं। लेकिन उसने मुझे डांटते हुए कहा, पापा आप क्यों परेशान कर रहे हो। मैं सो रही हूं। फिर उसने कहा, क्या यह खाने का समय है? अभी तो सिर्फ 8:30 बजे हैं। मुझे सोने दो। यह बातचीत याद करते हुए वह फूट-फूटर रोने लगे। वहीं विवेक के परिवार वालों का भी यही कहना है कि इस भयावह हादसे की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

होटल मालिक चार दिन की पुलिस रिमांड पर

हादसे के बाद पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे चार दिन के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच में कई नई बातें सामने आ रही हैं और कुछ लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। होटल के अकाउंटेंट और मैनेजर की तलाश भी जारी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि होटल को सिर्फ छह कमरे चलाने की मंजूरी मिली थी, लेकिन वहां 20 से ज्यादा कमरे चल रहे थे। अब पुलिस होटल से जुड़े कागजात, कर्मचारियों और दूसरे रिकॉर्ड खंगाल रही है।

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