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दिल्ली हाई कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने एक शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि दिल्ली के मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षक भी सरकारी स्कूल शिक्षकों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) के हकदार हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले को पलटते हुए कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम के तहत निजी स्कूलों के कर्मचारियों को भी सरकारी स्कूल कर्मचारियों के समान अवकाश सुविधाएं मिलनी चाहिए।
मामला एक मान्यता प्राप्त निजी, लेकिन गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) स्कूल में कार्यरत शिक्षिका से जुड़ा है। शिक्षिका ने अपने बारहवीं कक्षा में पढ़ रहे बेटे की देखभाल के लिए 1 मई 2025 से 30 सितंबर 2025 तक चाइल्ड केयर लीव यानी बच्चों के देखभाल के लिए मिलने वाले अवकाश की मांग की थी।
याचिका में कहा गया था कि उनका बेटा बोर्ड परीक्षा की तैयारी और पढ़ाई के दबाव से गुजर रहा है, जिसके कारण उसे मां के सहयोग और देखभाल की आवश्यकता है। हालांकि स्कूल प्रशासन ने उनकी छुट्टी की मांग स्वीकार नहीं की, जिसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
शुरुआत में मामले की सुनवाई करने वाले एकल न्यायाधीश ने कुछ पुराने फैसलों का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने उस समय कहा था कि निजी स्कूलों के शिक्षक सरकारी कर्मचारियों के समान सभी लाभ पाने के हकदार नहीं हैं।
इसके बाद शिक्षिका ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट की खंडपीठ में अपील दायर की।
सुनवाई के दौरान शिक्षिका की ओर से दलील दी गई कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम (DSE Act) की धारा 10 और नियम 111 के अनुसार मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को सरकारी स्कूल शिक्षकों के समान अवकाश और अन्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा नियमावली का नियम 111 स्पष्ट रूप से कहता है कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के कर्मचारी, चाहे स्कूल सहायता प्राप्त हो या नहीं, सरकारी स्कूलों में समान पद पर कार्यरत कर्मचारियों के बराबर लाभ पाने के हकदार हैं।
अदालत ने अपने आदेश में केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972 के नियम 43(C) का भी उल्लेख किया। इसके अनुसार महिला सरकारी कर्मचारियों को अपने दो बड़े जीवित बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों की देखभाल के लिए सेवा अवधि के दौरान अधिकतम 730 दिनों तक की चाइल्ड केयर लीव दी जा सकती है।
हाई कोर्ट ने कहा कि जब दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को यह सुविधा उपलब्ध है तो मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को इससे वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव ऐसे लाभ हैं, जिन्हें नकदी में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
अपने फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने संबंधित स्कूल को निर्देश दिया कि वह शिक्षिका के आवेदन पर जल्द से जल्द विचार करे और कानून के अनुसार निर्णय ले।
Updated on:
05 Jun 2026 04:55 pm
Published on:
05 Jun 2026 04:54 pm
