
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता(फोटो-IANS)
DDA Property Rules: दिल्ली में मकान, फ्लैट या जमीन खरीदने-बेचने वालों के लिए आने वाले दिनों में रजिस्ट्री का झंझट काफी कम हो सकता है। दिल्ली की भाजपा सरकार ऐसी व्यवस्था लाने की तैयारी में है, जिसके तहत लोगों को संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के लिए बार-बार सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रस्तावित व्यवस्था में मोबाइल या लैपटॉप के जरिए रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करने की योजना है।
फिलहाल संपत्ति के पंजीकरण के लिए खरीदार और विक्रेता को संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जाना पड़ता है। दस्तावेजों की जांच, पहचान और दूसरी औपचारिकताओं में समय लगता है। अगर किसी कागज में कमी निकल जाए तो लोगों को दोबारा कार्यालय पहुंचना पड़ता है। सरकार का प्रस्ताव लागू होने पर इसी परेशानी को खत्म करने की कोशिश की जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित सिस्टम में सबसे पहले खरीदार और विक्रेता को वेबसाइट पर संपत्ति से जुड़ी जानकारी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। इसके बाद सिस्टम यह जांच करेगा कि संबंधित संपत्ति किसी विवाद में तो नहीं है। अगर संपत्ति को लेकर कोई कानूनी अड़चन नहीं मिली तो रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन समय दिया जाएगा।
तय समय पर खरीदार और विक्रेता मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए अपनी पहचान, फोटो और डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद सब-रजिस्ट्रार डिजिटल तरीके से दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेगा। प्रस्ताव के मुताबिक पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रजिस्ट्री के दस्तावेज डिजिटल लॉकर में भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
सरकार का मानना है कि इससे लोगों का समय और आने-जाने का खर्च बचेगा। साथ ही दफ्तरों में सीधे संपर्क कम होने से पारदर्शिता बढ़ सकती है और रिश्वत से जुड़ी शिकायतों पर भी रोक लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसे लागू करने से पहले कैबिनेट की मंजूरी और जरूरी कानूनी बदलाव करने होंगे।
दिल्ली में प्रॉपर्टी से जुड़ा दूसरा अहम मुद्दा छोटे आवासीय प्लॉटों को लेकर है। मौजूदा मास्टर प्लान-2021 में दो छोटे आवासीय प्लॉटों को मिलाकर अधिकतम 64 वर्गमीटर तक का संयुक्त प्लॉट बनाने की अनुमति का प्रावधान है।
यानी बड़े आवासीय प्लॉटों को केवल इस आधार पर आपस में जोड़ने की अनुमति नहीं है। दूसरी ओर, बड़े स्तर के आवासीय पुनर्विकास के लिए अलग नियम हैं और ग्रुप हाउसिंग के मामले में 3000 वर्गमीटर का न्यूनतम प्लॉट आकार निर्धारित है।
दिल्ली में जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी के लिए DDA का GIS आधारित प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध है। DDA के मुताबिक यहां लेआउट और जमीन से जुड़ी जानकारी डिजिटल तरीके से देखी जा सकती है, हालांकि इसे कानूनी विवाद में अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
इस तरह आने वाले समय में दिल्ली में प्रॉपर्टी से जुड़े दो मोर्चों पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक तरफ रजिस्ट्री की प्रक्रिया को घर तक लाने की कोशिश और दूसरी तरफ जमीन के इस्तेमाल व निर्माण को लेकर नियमों को डिजिटल तरीके से ज्यादा स्पष्ट करना।
Updated on:
2 Sep 2026, 8:00 AM IST
Published on:
2 Sep 2026, 8:00 AM IST
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