
दिल्ली में घरेलू सहायिका की हत्या का आरोप, पुलिस चार्जशीट में डॉक्टर पर गंभीर आरोप (Photo: instagram/newsgramhq)
Delhi Murder Case: दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कैलाश हिल्स इलाके में 45 वर्षीय घरेलू सहायिका मीना हलदार की हत्या के मामले में पुलिस ने 50 वर्षीय त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष गुप्ता के खिलाफ 340 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस का आरोप है कि गुप्ता इस बात से नाराज थे कि घरेलू सहायिका उनकी बातों की बजाय उनकी पत्नी के निर्देशों को प्राथमिकता देती थी। पुलिस ने गुप्ता और उनके परिवार की ओर से दी गई मानसिक स्वास्थ्य संबंधी दलील को भी जांच के बाद खारिज किया है।
पुलिस के मुताबिक, मनीष गुप्ता माउंट कैलाश अपार्टमेंट्स में अपने फ्लैट के बगल में त्वचा रोग का क्लीनिक चलाते थे। 18 जून को करीब 10:30 बजे उनकी घरेलू सहायिका मीना हलदार रोजाना के काम के लिए घर पहुंची थीं। उनकी पत्नी सुबह करीब 10 बजे करोल बाग स्थित अपने आयुर्वेदिक क्लीनिक के लिए निकल गई थीं, जबकि उनका 18 वर्षीय बेटा अपने कमरे में सो रहा था।
चार्जशीट के अनुसार, गुप्ता ने मीना से अपना क्लीनिक साफ करने के लिए कहा था, क्योंकि वहां सुबह 11 बजे तक ग्राहक आने वाले थे। कुछ मिनट बाद जब उन्होंने क्लीनिक को साफ नहीं पाया तो कथित तौर पर वह गुस्सा हो गए और मीना को डांटने लगे।
पुलिस का आरोप है कि इसके बाद गुप्ता ने मीना से छत पर बने स्टोर रूम की सफाई करने को कहा। जैसे ही वह वहां पहुंचीं, गुप्ता ने कथित तौर पर बल्ले से उनके सिर पर हमला कर दिया।
चार्जशीट में पुलिस ने दावा किया है कि हमले के बाद मीना वहां से भागने में कामयाब हुईं, लेकिन गुप्ता ने कथित तौर पर उनका पीछा किया। पुलिस के अनुसार, छत पर पहुंचने के बाद गुप्ता ने मीना की गर्दन पर चाकू से छह बार वार किया।
पुलिस ने कहा है कि जिन हथियारों का इस्तेमाल कथित अपराध में किया गया, उन्हें विशेष रूप से हत्या के लिए खरीदे जाने का कोई सबूत नहीं मिला है।
सुबह करीब 11:40 बजे एक पड़ोसी ने मीना को छत पर खून से लथपथ हालत में देखा और पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने गुप्ता को उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि मीना हलदार करीब 16 वर्षों से गुप्ता के परिवार के यहां काम कर रही थीं। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि गुप्ता पिछले कुछ समय से मीना के काम से नाराज थे और उन्होंने कई बार अपनी पत्नी से उन्हें नौकरी से हटाने के लिए कहा था।
पुलिस ने मीना के बेटे का बयान भी दर्ज किया है। उसके अनुसार, मीना ने शिकायत की थी कि गुप्ता अक्सर उनके काम से असंतुष्ट रहते थे और उन्हें डांटते थे।
मामले में गुप्ता और उनके परिवार की ओर से यह दलील दी गई थी कि वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज करा रहे थे और कई वर्षों से एंटीडिप्रेसेंट दवाएं ले रहे थे।
हालांकि, पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि आरोपी का मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन कराया गया और उसके पुराने मेडिकल रिकॉर्ड तथा डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन की जांच की गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी के व्यवहार में हाल में कोई बदलाव आया हो, इसका ठोस प्रमाण नहीं मिला।
गुप्ता ने जांचकर्ताओं को कथित तौर पर बताया था कि वह अपने बेटे की पढ़ाई को लेकर तनाव में थे। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इस तनाव और हत्या के बीच कोई निर्णायक संबंध सामने नहीं आया।
पुलिस की 340 पन्नों की चार्जशीट में कुल 43 गवाहों के बयान शामिल हैं। मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। पुलिस के अनुसार, एक पड़ोसी अहम गवाह है, जिसने इमारत की नौवीं मंजिल से कथित हमले को देखा था।
पुलिस ने यह भी दावा किया है कि गुप्ता के कपड़ों से बरामद खून मीना हलदार के खून से मेल खाता है। गुप्ता फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
चार्जशीट साकेत की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीपिका ठाकरण की अदालत में दाखिल की गई है। मामले में संज्ञान लेने पर सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित है।
वहीं, गुप्ता के वकील कमल नयन तिवारी ने पुलिस के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने पहले 'काला जादू' से जुड़ी थ्योरी सामने रखी थी और अब घरेलू सहायिका को नौकरी पर रखने को लेकर गुप्ता और उनकी पत्नी के बीच विवाद की बात कही जा रही है।
वकील का दावा है कि ये पुलिस की गलत थ्योरी हैं और वास्तविक आरोपी तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस छत पर शव मिला, वहां आने-जाने के कई रास्ते हैं और किसी प्रत्यक्षदर्शी ने यह नहीं कहा कि गुप्ता ने हत्या की थी।
Updated on:
16 Sept 2026 09:49 am
Published on:
16 Sept 2026 09:47 am
