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‘मदद के लिए चीखते रहे लोग, क्रूज स्टाफ ने फेरा मुंह’; पीड़ित पिता का आरोप- दामाद ने ताला तोड़कर निकाली लाइफ जैकेट

Jabalpur Cruise Accident: जबलपुर के बरगी बांध में क्रूज हादसे के दौरान मां मरीना मेसी और उनके चार साल के बेटे की डूबने से मौत हो गई, जिनके शव एक ही लाइफ जैकेट में लिपटे मिले. परिजनों ने क्रूज स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि संकट के समय कोई मदद नहीं मिली और दामाद ने खुद ताला तोड़कर लाइफ जैकेट निकाली थी

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Jabalpur Cruise Accident

पीड़ित पिता का क्रूज स्टाफ पर गंभीर आरोप

Jabalpur Cruise Accident:मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी पर बरगी बांध में आए भीषण तूफान ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। गुरुवार को हुए इस क्रूज हादसे में जान गंवाने वाली मरीना मेसी (38) और उनके चार साल के बेटे त्रिशान को शनिवार को दिल्ली के द्वारका सेक्टर-19 स्थित कब्रिस्तान में अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान एक पीड़ित पिता ने संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के दौरान मदद के लिए जब लोग चिल्ला रहे थे तो क्रूज स्टाफ दर्शक की भांति केवल खड़े होकर देख रहे थे।

एक ही लाइफ जैकेट में मिले शव

मरीना और उनके मासूम बेटे त्रिशान के शव मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित क्रूज नाव के डूबे हुए हिस्से (हल) के अंदर से बरामद किए गए। रेस्क्यू टीम को दोनों के शव एक ही लाइफ जैकेट को साझा करते हुए मिले, जो एक मां द्वारा अपने बच्चे को बचाने की आखिरी और दिल दहला देने वाली कोशिश को दर्शाता है।

आंखों के सामने उजड़ गया परिवार

मरीना के पति प्रभाकर, जो इस हादसे में बच गए हैं, अपनी पत्नी और बेटे को खोने के बाद गहरे सदमे में हैं। उन्होंने भारी मन से बताया, 'मैंने अपनी आंखों के सामने मरीना और अपने बेटे को डूबते देखा है'। इस क्रूज पर परिवार के छह सदस्य सवार थे, जिनमें से केवल प्रभाकर, उनकी 14 वर्षीय बेटी सिया और ससुर जूलियस मैसी ही जीवित बच पाए।

अंतिम समय की वो चीखें

मरीना के भाई कुलदीप ने बताया कि हादसे से ठीक पहले मरीना उनसे वीडियो कॉल पर बात कर रही थी और उन्हें वहां का दृश्य दिखा रही थी। तभी अचानक मौसम बिगड़ा और फोन कटने से पहले उसकी आखिरी आवाज 'बचा लो… बचा लो…' गूंज रही थी।

लापरवाही की इंतहा

वहीं, इस हादसे में जीवित बचे जूलियस मैसी ने आरोप लगाया कि संकट के समय क्रूज के स्टाफ ने उनकी कोई मदद नहीं की। उन्होंने बताया कि उनके दामाद प्रभाकर ने लाइफ जैकेट वाली कैबिनेट का ताला खुद तोड़ा था। वहीं, अन्य परिजनों का कहना है कि अगर स्थानीय ग्रामीण मदद के लिए नहीं आते, तो शायद कोई भी नहीं बच पाता।

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