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JP Nadda CJP Meeting: JP नड्डा से मुलाकात पर CJP की शर्त, ‘BJP दफ्तर नहीं, न्यूट्रल वेन्यू पर होगी बात’

Cockroach Janta Party: दिल्ली की सियासी हवा में एक बार फिर अचानक गर्माहट तैर गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के एक कथित संदेश ने राजधानी की राजनीति में हलचल मचा दी है।
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CJP Says Ready for Talks with JP Nadda

CJP Says Ready for Talks with JP Nadda : JP नड्डा से मुलाकात पर CJP की शर्त, 'BJP दफ्तर नहीं, न्यूट्रल वेन्यू पर होगी बात' (फोटो सोर्स: ANI)

CJP Spokesperson Saurav Das: राजधानी दिल्ली में राजनीतिक दांव-पेच कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन बुधवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने सियासी गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस के जरिए उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बातचीत का संदेश मिला था।

सौरभ दास का कहना है कि पुलिस सुबह-सुबह उनके पास यह पैगाम लेकर पहुंची कि जेपी नड्डा उनसे संवाद करना चाहते हैं। हालांकि, इस बुलावा-कांड के बाद छोटे राजनीतिक दलों और मुख्यधारा की राजनीति के बीच के रिश्ते फिर से चर्चा में आ गए हैं।

'न्यूट्रल वेन्यू' की शर्त: किसी के दफ्तर नहीं जाएंगे!

सत्ता के बड़े केंद्रों में जाकर मुलाकात करने की परंपरा को खारिज करते हुए सौरभ दास ने अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कड़े शब्दों में कहा:

"हम किसी भी पार्टी या नेता के दफ्तर नहीं जाने वाले। अगर बातचीत होनी ही है, तो जंतर-मंतर के पास किसी निष्पक्ष (Neutral) स्थान पर ही हो सकती है।"

सौरभ दास का यह बयान साफ इशारा करता है कि वे सत्तापक्ष के साथ किसी भी बातचीत में समानता के धरातल पर खड़े होना चाहते हैं। जंतर-मंतर जो लंबे समय से देश में जन-आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र रहा है को इस मुलाकात के लिए चुनना अपने आप में एक बड़ा रणनीतिक संकेत है।

छोटी पार्टियों का बढ़ता दबदबा और दिल्ली का सियासी मिजाज

दिल्ली की राजनीति में अक्सर राष्ट्रीय पार्टियों और क्षेत्रीय दिग्गजों का वर्चस्व रहा है। ऐसे में 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे नए व अनूठे नाम वाले राजनीतिक संगठनों का आक्रामक रुख यह दिखाता है कि छोटी पार्टियां अब खुद को नजरअंदाज किए जाने के मूड में नहीं हैं।

जंतर-मंतर का सियासी महत्व: जंतर-मंतर केवल एक जगह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विरोध का प्रतीक है। किसी तटस्थ जगह की मांग करके सौरभ दास ने संदेश दिया है कि वे बातचीत के लिए तैयार तो हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर।

संवाद या दबाव की राजनीति? पुलिस के जरिए संदेश पहुंचने के दावे ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या यह सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक संपर्क है या इसके पीछे आगामी चुनावों और स्थानीय समीकरणों को साधने की कोई बड़ी रणनीति छिपी है।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) या जेपी नड्डा के दफ्तर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन एक बात तय है दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास की सियासी हलचल आने वाले दिनों में और तेज होने वाली है!