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अब पेट्रोल-डीजल कारों पर भी बढ़ेगा दबाव! सरकार लाई नए फ्यूल एफिशिएंसी नियम, इथेनॉल और CBG को पहली बार मिला बड़ा फायदा

Fuel Efficiency Rules India: केंद्र सरकार ने CAFE-III ड्राफ्ट नीति जारी कर नई फ्यूल एफिशिएंसी नियमों का प्रस्ताव रखा है। नए नियमों के तहत कारों को कम ईंधन खर्च और कम प्रदूषण फैलाने पर जोर दिया जाएगा। इथेनॉल, CBG और बायोफ्यूल से चलने वाले वाहनों को पहली बार विशेष लाभ देने की तैयारी है।
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Fuel Efficiency Rules India

सरकार ने नई CAFE-III ड्राफ्ट नीति जारी की है। फोटो सोर्स-ANI

Fuel Efficiency Rules India:केंद्र सरकार देश में प्रदूषण कम करने और साफ ईंधन को बढ़ावा देने की तैयारी में है। इसी को लेकर सरकार ने नई CAFE-III (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी) ड्राफ्ट नीति जारी की है। इस ड्राफ्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार इथेनॉल, बायोफ्यूल और कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) को खास छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे इन ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिलेगी।

जनता और कंपनियों से मांगे सुझाव

फिलहाल सरकार ने इस ड्राफ्ट पर लोगों और ऑटोमोबाइल कंपनियों से सुझाव मांगे हैं। कोई भी व्यक्ति 6 अगस्त 2026 तक अपनी राय दे सकता है। सुझाव मिलने के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।

ये नए नियम 1 अप्रेल 2027 से लागू होंगे और अगले पांच साल तक प्रभावी रहेंगे। ये नियम भारत में बनने और विदेश से आयात होकर बिकने वाली यात्री कारों पर लागू होंगे।

कम ईंधन, कम प्रदूषण पर जोर

सरकार चाहती है कि आने वाले समय में कारें कम ईंधन खर्च करें और कम प्रदूषण फैलाएं। इसी वजह से हर साल फ्यूल एफिशिएंसी के नियम पहले से ज्यादा सख्त किए जाएंगे। ड्राफ्ट के मुताबिक 2027-28 में कारों की औसत ईंधन खपत 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर रखने का लक्ष्य है, जिसे 2031-32 तक घटाकर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर करने की योजना है। इसके साथ ही गाड़ियों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा भी धीरे-धीरे कम करनी होगी।

ड्राफ्ट में इथेनॉल मिश्रित ईंधन इस्तेमाल करने वाले वाहनों को 8 प्रतिशत तक का कार्बन न्यूट्रैलिटी लाभ देने का प्रस्ताव है। वहीं CBG और दूसरे बायोफ्यूल के लिए यह लाभ उनके वास्तविक इस्तेमाल के आधार पर मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे साफ और वैकल्पिक ईंधन का उपयोग बढ़ेगा।

नई तकनीक अपनाने पर मिलेगा फायदा

नई तकनीक अपनाने वाली वाहन कंपनियों को भी राहत मिलेगी। यदि कोई कंपनी ऐसी तकनीक अपनाती है जिससे ईंधन की बचत होती है, तो उसे नियमों के पालन में अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी विशेष प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि ऐसे वाहनों की बिक्री बढ़ सके।

सरकार ने ड्राफ्ट में क्रेडिट सिस्टम भी रखा है। जो कंपनियां तय लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करेंगी, उन्हें क्रेडिट मिलेगा। वहीं लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली कंपनियां जरूरत पड़ने पर दूसरे निर्माताओं से या ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) से क्रेडिट खरीद सकेंगी। इसकी शुरुआती कीमत 2,500 रुपए प्रति क्रेडिट प्रस्तावित है, जो हर साल 500 रुपए बढ़ेगी।

सरकार ने साफ किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि जिन वाहन कंपनियों की सालाना बिक्री 1,000 से कम यात्री कारों की है, उन्हें इन नियमों से छूट मिलती रहेगी।