
सौरभ भारद्वाज और स्वतंत्र भारद्वाज। फाइल फोटो- आईएएनएस
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निशु आजाद के पिता से कथित मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली की राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें वह अपना बड़ा भाई बता रहे थे, गिरफ्तारी के बाद वही लोग उनके साथ खड़े नहीं हुए।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि स्वतंत्र भारद्वाज जिन नेताओं को अपना बड़ा भाई बताते थे, उनमें कपिल मिश्रा, चिराग पासवान और नरेंद्र मोदी का नाम शामिल है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारद्वाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों में भी नजर आए थे और उन्हें वहां जाने के लिए पास मिलता था, लेकिन अब जब पुलिस उनके पीछे है तो उनके कथित बड़े भाई दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और कई राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद कोई नेता स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में सामने नहीं आया। न कोई उनके लिए वीडियो बना रहा है और न ही कोई पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचकर उनके समर्थन में प्रदर्शन कर रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने स्वतंत्र भारद्वाज को सोशल मीडिया पर कही गई बातों को लेकर भी चेताया। उन्होंने कहा कि दिन-रात जो कुछ बोला जा रहा है, वह रिकॉर्ड हो रहा है। सोशल मीडिया से सामग्री हटाने के बाद भी लोग उसे सुरक्षित रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस नफरत के रास्ते पर युवाओं को ले जाया जा रहा है, उस रास्ते पर उन्हें आगे बढ़ाने वाले लोग खुद खुलकर उनके साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अलग-अलग मोहल्लों और कॉलोनियों में ऐसे कई युवा तैयार किए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जो लोग बंद कमरों में बड़े भाई बनते हैं, वे जरूरत पड़ने पर सामने नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि पीछे से मदद या आर्थिक सहयोग मिल सकता है, लेकिन जब खुलकर साथ खड़े होने की बात आती है तो यही लोग पीछे हट जाते हैं। उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज से कहा कि अगर वह इस बात को समझ लें तो अभी भी अपनी दिशा बदल सकते हैं। सौरभ भारद्वाज ने स्वतंत्र भारद्वाज के आंदोलन की तुलना अभिजीत दीपके के आंदोलन से भी की। उन्होंने कहा कि अभिजीत दीपके के आंदोलन में विपक्ष के लगभग सभी बड़े नेता जंतर-मंतर पहुंचे थे और खुलकर समर्थन दिया था। इसके विपरीत स्वतंत्र भारद्वाज और उनके साथियों के प्रदर्शन में कोई बड़ा नेता समर्थन देने नहीं आया।
उन्होंने कहा कि इससे यह समझा जा सकता है कि राजनीतिक लोग ऐसे युवाओं का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन खुलकर उनके साथ खड़े होने से बचते हैं। उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज और उनके जैसे युवाओं से कहा कि उन्हें इस पर विचार करना चाहिए कि वे किस दिशा में जा रहे हैं और उनका इस्तेमाल कौन कर रहा है। विवाद स्वतंत्र भारद्वाज के एक वायरल हुए वीडियो से शुरू हुआ। वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सीजेपी की कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर हमला किया था, जिसमें उनका सिर फट गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि भाजपा के नेताओं को वह अपना बड़ा भाई मानते हैं और उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
Updated on:
5 Sep 2026, 7:05 PM IST
Published on:
5 Sep 2026, 7:05 PM IST
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