
सुधांशु त्रिवेदी। फोटो- आईएएनएस
Sudhanshu Trivedi: भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शनिवार को सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा और कांग्रेस शासित राज्यों में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सहारनपुर में एजेंसियां और सरकार के संबंधित विभाग कानून के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं। ऐसे में इस कार्रवाई को राजनीतिक नजरिए से देखने की जरूरत नहीं है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि किसी भी इमारत को उसकी धार्मिक पहचान के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यह देखना जरूरी है कि कोई ढांचा कानूनी है या गैरकानूनी। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की घटना को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। जेपीएससी मामले का जिक्र करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि झारखंड में जांच के दौरान सामने आए तथ्य हैरान करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की परीक्षा में स्ट्रॉन्ग रूम को तोड़कर प्रश्न पत्र निकाले गए और उनमें बदलाव किया गया। उन्होंने कहा कि झारखंड में जो हुआ, वह केवल पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि पेपर लूट का मामला है।
सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल किया कि पेपर लूट की छूट कौन दे रहा है। इसका जवाब राहुल गांधी को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड में सामने आए मामले ने कांग्रेस की हकीकत सामने ला दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में परीक्षाओं के मुद्दे पर जो राजनीतिक दल आवाज उठा रहे थे, वे झारखंड के मामले पर चुप हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि बचपन में गांधीजी के तीन बंदरों की बात सुनी जाती थी, लेकिन अब लगता है कि वे राहुल गांधी के तीन बंदर बन गए हैं। जो देखना नहीं चाहते, वे आंखें बंद करके बैठे हैं। जो सुनना नहीं चाहते, वे कान बंद करके बैठे हैं और जो बोलना नहीं चाहते, वे मुंह पर हाथ रखकर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड के अभ्यर्थियों के बीच इस चुप्पी को साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। उन्होंने छात्रों से कहा कि कांग्रेस की इस चुप्पी को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह चुप्पी पूरे देश के अभ्यर्थियों के बीच सुनाई दे रही है। कांग्रेस शासित राज्यों में महिला प्रतिनिधित्व पर भी सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की चार राज्यों में सरकार है, लेकिन वहां महिला मंत्रियों की संख्या बेहद कम है। हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में एक भी महिला मंत्री नहीं है। केरल में दो महिला मंत्री हैं, जबकि तेलंगाना में पहले दो महिला मंत्री थीं, जिनमें से एक को हटा दिया गया। यानी चार सरकारों में महिला मंत्रियों की संख्या केवल तीन रह गई है।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति पर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चुप हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता महिलाओं को राजनीति में प्रतिनिधित्व देने की बात तो करते हैं, लेकिन उनके काम में इसका असर दिखाई नहीं देता। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसे परिसीमन के बिना तुरंत लागू करने की मांग की थी, जबकि विधेयक में साफ तौर पर परिसीमन के साथ इसे लागू करने की बात कही गई है। उन्होंने खड़गे पर तंज कसते हुए कहा कि अगर राजीव गांधी आज जीवित होते तो उनकी उम्र 82 वर्ष होती, जबकि खड़गे 84 वर्ष के हैं। उन्होंने कहा कि खड़गे को राहुल गांधी को हकीकत समझानी चाहिए, लेकिन आजकल किसी नौजवान को, खासकर दाढ़ी में सफेदी वाले उम्रदराज नौजवान को समझाना मुश्किल काम है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में आजादी के बाद सबसे ज्यादा महिला मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा जो कहती है, उसे पूरा करती है। महिलाओं के हित के मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी विश्वसनीयता के प्रतीक हैं, जबकि राहुल गांधी विश्वसनीयता के संकट के प्रतीक हैं। उन्होंने प्रियंका गांधी पर भी निशाना साधा। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रियंका गांधी 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' और महिलाओं को 50 प्रतिशत टिकट देने की बात करती हैं, लेकिन कांग्रेस शासित चार राज्यों में महिला मंत्रियों की कम संख्या पर चुप हैं। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं को कांग्रेस का यह चेहरा देखना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस 'पितृसत्ता को खत्म करो' का नारा लगाती है, लेकिन उसके शासन वाले राज्यों में महिला प्रतिनिधित्व की स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में आजादी के बाद सबसे ज्यादा महिला मंत्री हैं।
Updated on:
05 Sept 2026 03:20 pm
Published on:
05 Sept 2026 03:19 pm
