
सुप्रीम कोर्ट में असम के प्रोफेसर की जमानत याचिका पर सुनवाई।
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने असम के एक प्रोफेसर मोहम्मद जॉयनल आब्दीन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि प्रोफेसर का 'विकृत दिमाग' है और वे इंटरनेट का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रोफेसर पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के समर्थन में और महिलाओं के खिलाफ अश्लील टिप्पणियां की थीं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई की। यह याचिका गुवाहाटी उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी, जिसमें जुलाई में प्रोफेसर को राष्ट्र-विरोधी गतिविधि से जुड़े मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
मामले के अनुसार, प्रोफेसर ने फेसबुक पर एक पोस्ट की थी जिसमें लिखा था "हम पाकिस्तानी नागरिकों के भाइयों के साथ हैं और भविष्य में भी उनके साथ रहेंगे।" इस पोस्ट में तुर्की के राष्ट्रपति का भी समर्थन किया गया था, जिन्होंने कथित रूप से पाकिस्तान का पक्ष लिया था। पोस्ट वायरल होने के बाद प्रोफेसर को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने पहले निचली अदालत में ज़मानत की अर्जी दी, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए उसे खारिज कर दिया कि मामला आरोप तय होने की प्रक्रिया में है। इसके बाद उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अपील की।
लाइव लॉ के अनुसार, उच्च न्यायालय ने कहा कि यह पोस्ट ऐसे समय में की गई थी जब भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण थे। कोर्ट ने माना कि प्रोफेसर ने भारत के बजाय पाकिस्तान का समर्थन किया और इस तरह उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51ए में वर्णित नागरिक कर्तव्यों का उल्लंघन किया। अदालत ने आदेश दिया कि आरोप तय होने और अभियोजन पक्ष के कम से कम दो गवाहों से पूछताछ के बाद ही ज़मानत पर दोबारा विचार किया जाए। इस आदेश के खिलाफ प्रोफेसर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि प्रोफेसर एक सरकारी कॉलेज में पढ़ाते हैं, उन्हें निलंबित किया जा चुका है और वे अब तक 179 दिन जेल में रह चुके हैं। राज्य की ओर से पेश वकील ने बताया कि उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हैं। इनमें से एक मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत है। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ कई बार अश्लील पोस्ट डाली हैं, जिन्हें खुली अदालत में पढ़ना भी मुश्किल है। यह सुनकर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "आपने बच्चों और परिपक्व महिलाओं तक को नहीं बख्शा। हर तरह की घिनौनी हरकत करते हैं और फिर इस तरह का बयान देते हैं। क्या आपको लगता है कि आप देश के कानून से ऊपर हैं?"
वकील ने सफाई दी कि जैसे ही प्रोफेसर को अपनी गलती का अहसास हुआ, उन्होंने पोस्ट हटा दी। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब उन पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधि का आरोप लगा है। लेकिन न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि रिकॉर्ड देखकर लगता है कि प्रोफेसर इंटरनेट का लगातार दुरुपयोग कर रहे हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा "आप युवा लड़कियों के लिए खतरा हैं। आप किस तरह के शिक्षक हैं? आपने प्रोफेसर शब्द को शर्मसार कर दिया है।"
वकील ने दलील दी कि यह याचिकाकर्ता की 'अपरिपक्वता' का मामला है और उनकी दो नाबालिग बेटियां हैं। उन्होंने यह भी बताया कि निचली अदालत में मामला आगे नहीं बढ़ रहा है क्योंकि मई से वहां कोई पीठासीन अधिकारी (जज) नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राज्य सरकार को एक सप्ताह में निर्देश प्राप्त करने को कहा। साथ ही, गुवाहाटी उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वह संबंधित अदालत में जल्द से जल्द नए पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति पर विचार करे ताकि मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ सके।
Published on:
13 Nov 2025 02:53 pm
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