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PM मोदी के बगल में खड़े होकर बातें! रेवती सुले के रिसेप्शन में पहुंचे ‘कटहल किंग’, कौन हैं मिथिलेश देसाई

Mithilesh Desai Jackfruit King: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार की नातिन रेवती सुले के रिसेप्शन में कोंकण के 'कटहल किंग' कहे जाने वाले मिथिलेश देसाई ने पीएम मोदी से मुलाकात की। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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PM Modi with India Jackfruit King

पीएम मोदी के साथ बातचीत करते मिथिलेश देसाई (Photo: X/@yadavrinku2025)

Supriya Sule Daughter Wedding Reception: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले और सारंग लखानी के शादी का रिसेप्शन सोमवार को दिल्ली में आयोजित किया गया। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत देश के कई बड़े नेता और दिग्गज शामिल हुए। लेकिन इस दौरान एक तस्वीर ने खास तौर पर लोगों का ध्यान खींचा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास खड़ा एक युवा उन्हें मोबाइल पर कुछ दिखाता नजर आया। यह कोई और नहीं, बल्कि रत्नागिरी के मशहूर 'कटहल किंग' मिथिलेश देसाई हैं।

शरद पवार ने कराई पीएम मोदी से मुलाकात

रेवती सुले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार की नातिन हैं। जबकि सारंग लखानी भाजपा विधायक और उद्योगपति अरुण लखानी के बेटे हैं। इसलिए इस कार्यक्रम में राजनीति के दिग्गजों की मौजूदगी पहले ही चर्चा का विषय बनी हुई थी। इसी दौरान पीएम मोदी के साथ मिथिलेश देसाई की मुलाकात ने सबका ध्यान खींच लिया।

बताया जा रहा है कि शरद पवार ने अपनी नातिन के रिसेप्शन में युवा उद्यमी मिथिलेश देसाई को भी आमंत्रित किया था। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद मिथिलेश की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराई। इस दौरान मिथिलेश ने अपने कटहल से जुड़े काम और अन्य गतिविधियों के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी। पीएम मोदी ने भी बड़े ध्यान से मिथिलेश की बाते सुनी। इस दौरान शरद पवार भी उनके बगल में बैठे थे।

कौन हैं 'कटहल किंग' मिथिलेश देसाई?

मिथिलेश देसाई महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र के रत्नागिरी जिले के लांजा के रहने वाले हैं और उन्हें 'कटहल किंग' के नाम से जाना जाता है। वह जर्मनी में इंजीनियर के तौर पर काम कर चुके हैं और पिछले कई वर्षों से भारत में कटहल की वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों के जरिए बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं। उन्होंने कटहल की विभिन्न किस्मों के संरक्षण और उनके व्यावसायिक उपयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है।

86 किस्मों के कटहल और 'कृषि गौरव पुरस्कार' से सम्मानित

मिथिलेश देसाई ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से 86 विविध प्रकार की कटहल की किस्मों को संरक्षित और एकत्रित करने का काम किया है। उनके इसी काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। दुनिया की कई रिसर्च लैब उनसे कटहल लेती हैं।

उनके काम को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार की ओर से उन्हें 'कृषि गौरव पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है। फलोद्यान विकास और टिकाऊ खेती के क्षेत्र में उनके योगदान को इस सम्मान के जरिए पहचान मिली।

मिथिलेश देसाई की कंपनी जैकफ्रूट ऑफ इंडिया (Jackfruit of India) ने करीब तीन साल पहले लंदन स्थित ‘सर्कुलेरिटी इनोवेशन हब’ के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया था। इस पहल से रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के 1000 से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।

कृषि कचरे को कमाई में बदलने का मॉडल

मिथिलेश देसाई का काम सिर्फ कटहल तक सीमित नहीं है। उनका मॉडल कृषि क्षेत्र में निकलने वाले अवशेषों को बेकार समझने के बजाय उनसे नए उत्पाद तैयार करने पर आधारित है।

इस तरह एक तरफ किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है, वहीं दूसरी तरफ कृषि कचरे का बेहतर इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण भी संभव होता है। इस मॉडल के तहत आम की गुठली और छिलके, काजू के फल समेत कृषि से निकलने वाले ऐसे अवशेषों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें आमतौर पर बेकार समझा जाता है। इन्हीं चीजों से ऐसे उत्पाद तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग और कीमत हो सकती है।

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