
नई दिल्ली। देश में नागरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार भारतीय सेना के सहयोग से सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों के लिए विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू करने जा रही है। पहले चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 600 मास्टर ट्रेनर को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक यह प्रशिक्षण पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद प्रत्येक मास्टर ट्रेनर अपने राज्य में 100 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगा। इस तरह 60 हजार स्वयंसेवकों तक विशेष प्रशिक्षण पहुंचाने की योजना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए आधुनिक प्रणालियों, तकनीक और नए सुरक्षा खतरों से निपटने की क्षमता से लैस मजबूत नागरिक सुरक्षा नेटवर्क बनाने का लक्ष्य रखा था। इसी दिशा में गृह मंत्रालय के अंतर्गत अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षक महानिदेशालय भारतीय सेना के साथ मिलकर यह पहल कर रहा है। इसे नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों और सेना के बीच तालमेल बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पहले चरण में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु को शामिल किया गया है। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 50-50 मास्टर ट्रेनर को सेना के निर्धारित प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण में आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन से जुड़े खतरे और हवाई हमलों की चेतावनी को समझने पर जोर रहेगा। इसके अलावा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, आग से बचाव, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से निपटने की जानकारी, घायलों की देखभाल, तलाशी और बचाव अभियान भी प्रशिक्षण का हिस्सा होंगे। आपातकालीन संचार व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, डिजिटल प्रणालियों की मजबूती, सेना और नागरिक प्रशासन के बीच समन्वय तथा आपात स्थिति में नेतृत्व और प्रबंधन की क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। पहले चरण के अनुभव और परिणामों के आधार पर इस पहल को आगे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तार देने की योजना है।
Updated on:
26 Oct 2026, 1:07 PM IST
Published on:
26 Oct 2026, 1:07 PM IST
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