
उमर खालिद ने जमानत खारिज होने के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया, फोटो सोर्स- ians
Umar Khalid Delhi riots UAPA case: साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के मामले में आरोपी, एक्टिविस्ट और जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। खालिद ने कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा यूएपीए (UAPA) कानून के तहत दर्ज इस मामले में अपनी नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। उनकी इस अपील पर जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई तय की गई है।
उमर खालिद ने कड़कड़डूमा कोर्ट के 4 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। अपनी मुख्य अपील के साथ ही खालिद ने एक अंतरिम जमानत याचिका भी दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट इस अहम कानूनी सवाल पर फैसला नहीं कर लेता कि क्या लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी यूएपीए जैसे सख्त कानून के तहत जमानत देने का आधार बन सकती है, तब तक उन्हें अंतरिम जमानत दी जाए।
अपनी याचिका में खालिद ने दलील दी है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 जनवरी को उनकी पिछली जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद 6 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद निचली अदालत में मुकदमे की कार्रवाई में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। याचिका में कहा गया है कि वह सितंबर 2020 से लगातार न्यायिक हिरासत में हैं और छह साल के करीब समय बीत जाने के बावजूद मामले में अभी तक आरोप भी तय नहीं हो सके हैं। फिलहाल अदालत में केवल आरोप तय करने को लेकर बहस चल रही है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर विचार कर रहा है कि क्या किसी आरोपी की लंबी अवधि की हिरासत यूएपीए की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर लगी रोक को शिथिल करने का आधार बन सकती है। इस मुद्दे पर अलग-अलग पीठों की भिन्न राय के बाद मामला बड़ी पीठ को भेजा गया है।
Updated on:
30 Jul 2026 07:52 pm
Published on:
30 Jul 2026 07:52 pm
