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Delhi: जन्म के बाद हुआ पीलिया, हालत बिगड़ी तो मामा ने लिवर का हिस्सा देकर 5 माह की भांजी को दी नई जिंदगी

Liver Transplant: गंभीर लिवर बीमारी से जूझ रही पांच माह की बच्ची की जान बचाने के लिए उसके मामा ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया। निजी अस्पताल में बच्ची का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया गया और 20 दिन बाद उसे छुट्टी दे दी गई।
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Liver Transplant

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली। गंभीर बीमारी से जूझ रही एक छोटी बच्ची को उसके मामा ने अपने लिवर का टुकड़ा देकर उसकी जान बचाई है। एक निजी अस्पताल में डॉ. आशीष जॉर्ज के नेतृत्व में इस जटिल पिडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। इस मामले में पांच माह की सांविका शुक्ला के बाइल डक्ट में अवरोध की शिकायत थी, जिसकी वजह से उसके लिवर में घाव हो गए थे और लिवर फेलियर के हालात उत्पन्न हो गए थे।

पीलिया से पीड़ित

बच्ची जन्म के कुछ हफ्तों बाद ही पीलिया से पीड़ित हो गई थी। उसकी हालत लगातार बिगड़ने लगी थी और ऐसे में तत्काल लिवर ट्रांसप्लांट ही जीवन बचाने का एकमात्र विकल्प था, लेकिन अस्पताल में विस्तृत मेडिकल जांच में दोनों पैरेन्ट्स और बच्ची की दादी को लिवर डोनेशन के लिए उपयुक्त नहीं पाया, जिसके कारण पूरा परिवार काफी दुखी था। इसे देखते हुए बच्ची के मामा शिवेन्द्र कुमार पांडेय ने अपनी भांजी का जीवन बचाने के लिए अपने लिवर का एक हिस्सा डोनेट करने का फैसला किया।

अस्पताल से छुट्टी मिली

यह सर्जरी सफल रही और बच्ची कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो गई। सर्जरी के 20 दिनों के बाद बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मामले की जानकारी देते हुए डॉ जॉर्ज ने कहा कि इस बच्ची को जब उपचार के लिए अस्पताल लाया गया, तो वह गंभीर रूप से बीमार थी और जल्द से जल्द लिवर ट्रांसप्लांट कर उसे स्थिर करना जरूरी था। पांच माह के शिशु पर इस सर्जरी को करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि धमनियों का आकार बेहद छोटा होता है और ऐसे में सर्जरी के दौरान काफी सावधानी और सटीकता बरतना जरूरी होता है।

जीवन का बेहद बहुमूल्य फैसला

इस मामले में एक और चुनौती यह भी थी कि शिशु के लिवर को रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिनी (वेन) काफी छोटे आकार की थी। इन समस्याओं से निपटने के लिए हमने एक कैडेवरिक डोनर की सुरक्षित रखी गई वेन का इस्तेमाल किया। सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के दौरान पूरी सावधानी के चलते बच्ची को 20 दिनों बाद अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। लिवर डोनर शिवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि अपने लिवर का एक हिस्सा देकर अपनी भांजी की जान बचाने का यह अवसर मेरे जीवन का बेहद बहुमूल्य फैसला था और यह सबसे कीमती उपहार भी है जो मैं रक्षाबंधन से पहले अपनी बहन को दे सकता हूं। अपनी बहन की गोद में मुझे अपनी भांजी को स्वस्थ और मुस्कुराते हुए देखकर बेहद खुशी मिली है और यह हम सभी के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।