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ये पूर्णिमा कहलाती है त्रिपुरारी पूर्णिमा, जानिए 2020 में इसका शुभ समय, तिथि और पर्व त्यौहार

सृष्टि को बचने के लिए लिया था अवतार...
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भोपाल

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Deepesh Tiwari

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Updated: 9 Apr 2020, 6:49 PM IST

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हिन्दू पंचांग के अनुसार माह के 30 दिन को चन्द्र कला के आधार पर 15-15 दिन के 2 पक्षों में बांटा गया है- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते हैं और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या।

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्त्व और फल माना गया है। जो भी व्यक्ति चाहे महिला हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध जो भी इस व्रत को पूरे नियम के साथ और भक्ति से करता है उसे अवश्य ही मनचाहा फल मिलता है।

कार्तिक पूर्णिमा का अलग और सभी पूर्णिमा में विशेष महत्त्व है क्योंकि इस दिन गंगा और अन्य नदिओं में स्नान करके दीप दान, वस्त्र और अन्न दान करके सभी और दिनों की अपेक्षा कई गुना माना गया है। मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने के बाद जो भी बछड़ा दान करता है उसे शिव लोक की प्राप्ति होती है।

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इसी दिन भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए और सृष्टि को बचने के लिए मतस्य अवतार लिया था।

महाभारत के युद्ध के बाद जब युधिष्ठिर विचलित थे की 18 दिन के भयंकर युद्ध में उनके सगे संबंधी मृत्यु को प्राप्त हुए है और ऐसे में उन्हें आत्मशांति प्राप्त नहीं हुई है तो वह ऐसा क्या करें की उनकी आत्मा को मुक्ति मिल जाए। तब श्री कृष्ण ने उन्हें पितरों की तृप्ति के लिए के लिए बताया की गढ़ मुक्तेश्वर में स्नान करके दीपदान करें, तर्पण करें। ऐसा करने से उनकी आत्मा को संतुष्टि मिलेगी। और यह परम्परा तभी से चली आ रही है।

इस दिन भगवान् शिव को नया नाम मिला था – त्रिपुरारी। जब अजर अमर त्रिपुरासुर का भगवान् शिव में संहार किया था इस असुर के मारे जाने के बाद तीनो लोकों में धर्म को फिर से स्थापित किया गया और तभी से इससे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। और इसी दिन को देव दीपावली भी कहा जाता है।

2020 में कब है कार्तिक माह की पूर्णिमा?...

पूर्णिमा का दिन- सोमवार 30नवम्बर,2020 समय – 12:47 से आरम्भ होकर रात 2:59 तक

कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर 2020 सोमवार के दिन है। कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर 2020 सोमवार को रात 12:47 से आरम्भ हो कर 30 नवंबर 2020 रात 2:59 पर समाप्त है। कार्तिक पूर्णिमा को गुरु नानकदेव जी की जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सिक्खों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। कार्तिक पूर्णिमा को पुष्कर मेला भी लगता है।