
नवरात्रि में दुर्गा पूजा और माता को प्रसन्न करने के लिये कई उपाय किये जाते हैं। नौं दिनों में सभी माता के स्वरुपों को पूजते हैं और उनसे मनवांछित फल की कामना करते हैं। लेकिन यदि आप नवरात्रि में पूजा करने के लिये ज्यादा समय नहीं निकाल पा रहे हैं, तो सिर्फ मिनट में ये पाठ करके देवी मां को प्रसन्न कर सकते हैं। पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं कि इस पाठ के बारे में भगवान शिव ने स्वयं माता पार्वती को बताया था कि इस पाठ को करने से दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ का फल मिलता है।
यदि आप सिर्फ 5 मिनट में दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्याय, कवच, कीलक, अर्गला, न्यास के पाठ का पुण्य प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपके लिए यह उपाय काफी उपयोगी हो सकता है।इसलिये देवी मां को प्रसन्न करने के लिये कुंजिका स्त्रोत पाठ जरुर करें...
शिव उवाच
पाठमात्रेण संसिद्ध् येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥4॥
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।।"
॥ इति मंत्रः॥
[typography_font:14pt]नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषामर्दिन ॥1॥
[typography_font:14pt]नमस्ते शुंभहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन ॥2॥
[typography_font:14pt]जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे।
[typography_font:14pt]ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका॥3॥
[typography_font:14pt]क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते।
[typography_font:14pt]चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी॥ 4॥
[typography_font:14pt]विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण ॥5॥
[typography_font:14pt]धां धीं धू धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।
[typography_font:14pt]क्रां क्रीं क्रूं कालिका देविशां शीं शूं मे शुभं कुरु॥6॥
[typography_font:14pt]हुं हु हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
[typography_font:14pt]भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥7॥
[typography_font:14pt]अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
[typography_font:14pt]धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥
[typography_font:14pt]सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्र सिद्धिं कुरुष्व मे॥
[typography_font:14pt]इदं तु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे।
[typography_font:14pt]अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥
[typography_font:14pt]यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत् ।
[typography_font:14pt]न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥
[typography_font:14pt;" >। इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम् ।
Updated on:
04 Oct 2019 11:20 am
Published on:
04 Oct 2019 11:14 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
