
These things are going to be banned
Wedding Muhurat 2022 : ज्योतिष के विभिन्न ग्रहों में से एक देवताओं के गुरु बृहस्पति को प्रमुख ग्रह माना जाता है। ऐसे में हर तरह के मांगलिक कार्यों में देवगुरु बृहस्पति को विशेष माना जाता है। इसका कारण यह है कि देवगुरु बृहस्पति शादि समेत अन्य सभी मांगलिक कार्यों के कारक माने गए हैं। ऐसे में साल 2022 के फरवरी में गुरु का अस्त होना कई चीजों को प्रभावित करेगा।
ज्योतिष के जानकार एके शुक्ला के अनुसार दरअसल ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को धनु व मीन राशि का स्वामित्व प्राप्त है। ऐसे में देवगुरु बृहस्पति के अस्त होने का सर्वाधिक प्रतिकूल असर इन दोनों राशियों पर ही पड़ेगा। ऐसे में इन प्रभावों से बचने के लिए देवगुरु बृहस्पति से जुड़े उपाय इन राशि वालों की काफी मदद कर सकते है।
इस दौरान गुरुवार का व्रत और गुरुवार के दिन चने की दाल, गुड़ आटे की लोई में थोड़ी सी हल्दी डालकर गाय को खिलाने देवगुरु के अशुभ प्रभावों को कम कर सकता है।
वहीं इस साल 24 फरवरी से देवगुरु अस्त होने जा रहे हैं, ऐसे में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और नामकरण आदि शुभ कार्यों पर विराम लग जाएगा। वहीं इसके पश्चात देवगुरु बृहस्पति के उदय होने पर ही शुभ कार्यों पर लगा विराम हटेगा। लेकिन इस बार देवगुरु के उदय के बावजूद करीब 1 माह तक शुभ कार्यों पर रोक बनी रहेगी।
यहां ये जान लें कि साल 2022 में मकर संक्रांति के दिन से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हुई थी। ऐसे में एक बार फिर से 4 दिन बाद यानि गुरुवार, 24 फरवरी से मांगलिक कार्यों पर रोक लगने जा रही है।
जिसके तहत इस बार डेढ़ माह के लिए विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और नामकरण आदि कार्यों रूक जाएंगे। जिसके बाद 15 अप्रैल से शुभ कार्य पुन: प्रारंभ होंगे।
अस्त रहेंगे बृहस्पति का इस दिन होगा उदय
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार साल 2022 में देवगुरु बृहस्पति 24 फरवरी से 24 मार्च तक अस्त रहने के पश्चात उदय हो जाएंगे। लेकिन इसके बावजूद करीब एक माह तक शुभ कार्यों पर रोक बनी रहेगी। इसका कारण यह है कि देवगुरु के उदय के बाद होलाष्टक लग जाएंगे और फिर उसके बाद सूर्य के मीन मलमास की शुरुआत हो जाएगी। ऐसे में 15 अप्रैल तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जा सकेंगे।
किसी ग्रह के अस्त होने को ऐसे समझें
ज्ञात हो कि इस साल यानि 2022 में रविवार, 13 फरवरी को सूर्य राशि बदलकर मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश कर चुके हैं। जबकि इस दौरान कुंभ राशि में देवगुरु बृहस्पति पहले से ही मौजूद थे। ऐसे में माना जताा है कि जब सूर्य किसी दूसरे ग्रह के अत्यंत करीब आता है, तो इससे उस ग्रह की शक्तियों का प्रभाव कम होने लगता है, साधारण भाषा में ये समझें सूर्य अत्यंत करीब होने पर दूसरे ग्रह को जला देते हैं।
इसे ही उस ग्रह का अस्त होना कहा जाता है। ऐसे ही सूर्य के अत्यंत करीब आने से देवगुरु बृहस्पति भी अस्त होंगे। शास्त्रों में गुरु ग्रह को शुभ कार्यों का प्रतीक माना गया है और उनके प्रभाव का असर अत्यंत कम होने के चलते देवगुरु बृहस्पति लगभग प्रभावहीन से हो जाएंगे।
Published on:
21 Feb 2022 12:42 pm
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