इस एकादशी को Shattila Ekadashi इसलिए कहा जाता है क्योंकि तिल का प्रयोग छह रूपों में किया जाता है—
तिल जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल से तर्पण, तिल का सेवन और तिल का दान।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल शनिदेव का कारक है, इसलिए इस दिन तिल का दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं।