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मिट्टी के सृजनहार को किन्नरों का सम्मान, सोने-चांदी के गहनों से नवाजा

किन्नर महासम्मेलन : भक्ति, परंपरा और प्रेम का संगम बनी किन्नरों की चाक कलश यात्रा, आस्था और संवेदना का अद्भुत संगम, कुम्हार के घर जाकर की चाक की पूजा, नागौर में जुटे हैं देशभर के गादीपति किन्नर व पंच
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गादीपति रागनी बाई के नेतृत्व में चाक कलश यात्रा निकाली गई

गादीपति रागनी बाई के नेतृत्व में चाक कलश यात्रा निकाली गई

नागौर. अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन का तीसरा दिन धार्मिक उल्लास और पारंपरिक रस्मों से सराबोर रहा। देशभर से पहुंचे गादीपति किन्नरों और पंचों की अगुवाई में बुधवार को कार्यक्रम स्थल माली समाज भवन से गाजे-बाजे के साथ किन्नर समाज की ओर से भव्य चाक कलश यात्रा निकाली गई, जो चैनार निवासी एक कुम्हारी दम्पती के घर पहुंची। यह यात्रा भक्तिमय माहौल और लोक संस्कृति की झलक के साथ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

सुबह करीब साढ़े दस बजे नागौर की गादीपति रागनी बाई के नेतृत्व में मंगलाचार और देवी-देवताओं की स्तुति के साथ चाक कलश यात्रा शुभारंभ हुआ। किन्नर समुदाय के सदस्य पारंपरिक वेशभूषा एवं सोने के गहनों में सज-धज कर यात्रा में शामिल हुए। ढोल की थाप और बैंड की धुन पर किन्नरों ने जमकर नृत्य किया। स्थानीय लोगों ने जगह-जगह यात्रा का स्वागत किया।

यात्रा का सबसे भावनात्मक और धार्मिक क्षण तब आया जब सभी किन्नर चैनार के एक कुम्हार परिवार के घर पहुंचे। वहां उन्होंने चाक (कुम्हार के घड़े बनाने वाले पहिए) की पूजा-अर्चना की। किन्नरों ने परंपरानुसार चाक पर फूल, अक्षत और नारियल चढ़ाकर समाज में श्रम की महत्ता को प्रणाम किया। किन्नर समाज की परंपरा के अनुसार गादीपति रागनी बाई ने गेनाराम प्रजापत को साफा-माला सोने की अंगूठी पहनाकर सम्मान किया, वहीं उनकी पत्नी नैनीदेवी प्रजापत को सोने का हार, कान के झूमके और पैरों की पायल भेंट कर रुपयों से झोली भर दी। इसके साथ दम्पती को दो जोड़ी कपड़े भी दिए गए। वहीं दूसरी तरफ कुम्हार समाज की ओर से भी किन्नरों का परम्परा अनुसार मान-सम्मान कर आशीर्वाद लिया गया। यह सम्मान समारोह मौके पर उपस्थित लोगों के लिए भावनात्मक क्षण रहा, जब किन्नरों ने कहा कि ‘मिट्टी से जीवन गढऩे वाला ही सच्चा सृजनहार है।’

किन्नर समाज का पीहर है कुम्हार

अजमेर की गादीपति सलोनी बाई ने कहा कि किन्नर समाज की वर्षों पुरानी परम्परा अनुसार आज चाक पूजन किया गया। सलोनी बाई ने बताया कि किन्नर समाज में कुम्हार को अपना पीहर माना जाता है, इसलिए इस परम्परा को धूमधाम से मनाया जाता है। किन्नर महासम्मेलन में आए देशभर के गादीपति और पंचों ने बताया कि इस चाक पूजन की परंपरा समाज में कर्म, सृजन और सम्मान के प्रतीक के रूप में सदियों से निभाई जाती आ रही है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, प्रेम और समरसता का संदेश देता है।

एक नवम्बर को बंशीवाला तक निकाली जाएगी गंगाजल यात्रा

महासम्मेलन के आयोजकों ने बताया कि एक नवम्बर को कार्यक्रम स्थल से चांदी के कलश में गंगा जल भरकर बंशीवाला मंदिर तक जुलूस निकाला जाएगा। मंदिर पहुंचकर बंशीवाला को 16 तोला का सोना का छत्र चढ़ाया जाएगा। महासम्मेलन स्थल पर शाम को भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर बुधवार को भी जारी रहा। मंच पर किन्नर कलाकारों ने देवी भजनों और लोकगीतों की प्रस्तुति दी, जिन पर उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे। किन्नर समाज के वरिष्ठ गादीपति नेताओं ने बताया कि सम्मेलन में अगले दो दिनों तक समाज के अधिकार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। उन्होंने कहा कि समाज को मुख्यधारा से जोडऩे और सम्मानजनक जीवन के लिए यह महासम्मेलन एक सशक्त माध्यम है।