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यमुना नदी में प्रदूषण का स्तर हुआ खतरनाक, सीपीसीबी ने नोएडा प्राधिकरण को ठहराया जिम्मेदार

Highlights - केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी फाइनल जांच रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सौंपी - कहा-नोएडा के छोटे नालों का अशोधित पानी कोंडली और शाहदरा के बड़े नाले में मिल रहा - बीओडी 30 की जगह 94 और सीओडी 250 की जगह 364 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंचा

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आशुतोष पाठक

नोएडा। यमुना नदी में बढ़ रहे प्रदूषण के स्तर के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोएडा प्राधिकरण को बड़ा जिम्मेदार माना है। बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सौंपी अपनी फाइनल रिपोर्ट में दावा किया है कि नोएडा की ओर से छोड़ा जा रहा अशोधित पानी सीधे कोंडली और शाहदरा के बड़े नाले में मिल रहा है। इन दोनों ही नालों से गंदा पानी सीधे यमुना नदी में मिल रहा है, जिससे उसका प्रदूषण स्तर खतरनाक होता जा रहा है। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि बड़े नालों में मिलने वाले शोधित पानी में बीओडी का स्तर करीब तीन गुना और सीओडी का स्तर करीब डेढ़ गुना अधिक मिला है।

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी)ने कोंडली और शाहदरा नाले में प्रदूषण को लेकर अपनी फाइनल जांच रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी को सौंप दी है। रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण को उल्लेखित करते हुए कहा गया है कि इन दोनों नालों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की जरूरत है। इसके तहत इन दोनों नालों में सीधे मिल रहे 30 छोटे नालों के अशोधित पानी को तुरंत रोकने की जरूरत है।

इससे पहले, प्राधिकरण के अधिकारियों ने सीपीसीबी को पत्र लिखकर यह दावा किया था कि 30 छोटे नालों के जरिये जो पानी छोड़ा गया वह बाढ़ का पानी था। इसमें यह भी बताया गया कि इन दोनों ही नालों में प्राधिकरण की ओर से अशोधित पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही प्राधिकरण ने यह भी दावा किया था कि इन दोनों ही नालों में प्रदूषण की बड़ी वजह दिल्ली की ओर से आ रहा अशोधित पानी है।

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हालांकि, अपनी जांच के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि इन दोनों ही नालों में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है और यह यमुना नदी में प्रदूषण को बढ़ाने में बड़ा कारक साबित हो रहा है। बोर्ड के अधिकारियों ने यह भी बताया कि नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ मिलकर एक जांच टीम ने इन दोनों नालों का विभिन्न इलाकों में दौरा किया, जिसमें सेक्टर 24 और 23 में यह अशोधित पानी छोड़े जाने का नजारा दिखा। जांच रिपोर्ट में यह संकेत मिले कि बायोकेमिकल ऑक्सीडाइज डिमांड (बीओडी) 94 मिलीग्राम प्रति लीटर और केमिकल ऑक्सीडाइज डिमांड (सीओडी) की मात्रा 364 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह भी देखा गया है कि सेक्टर 23 औ 24 के छोटे नाले का अशोधित पानी सीधे बड़े नाले में मिल रहा है।

बता दें कि बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड और केमिकल आक्सीजन डिमांड पानी जल प्रदूषण को इंगित करते हैं। छोड़े गए पानी में बीओडी का स्तर 30 मिलीग्राम प्रति लीटर और सीओडी का स्तर 250 मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में नोएडा की तरफ से नालों के जरिये छोड़े जा रहे पानी को तत्काल शोधित प्रक्रिया अपनाने की जरूरत बताई है।