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अविश्वसनीयः 14 जनवरी नहीं पहले 22 दिसंबर को मनार्इ जाती थी मकर संक्रांति, इतने साल बाद 16 जनवरी को मनार्इ जाएगी

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) मनाने की तिथि को लेकर बने रहे असमंजस के कारण

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नोएडा

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lokesh verma

Jan 14, 2019

makar sankranti

अविश्वसनीयः 14 जनवरी नहीं पहले 22 दिसंबर को मनार्इ जाती थी मकर संक्रांति, इतने साल बाद 16 जनवरी को मनार्इ जाएगी

नोएडा. पिछले तीन वर्षों से मकर संक्रांति (Makar Sankranti) को लेकर असमंजस की स्थिति बनी है। बता दें कि पहले मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाता था, लेकिन 2015 से मकर संक्रांति की तिथि यानि 14 या 15 जनवरी को लेकर असमंजस बरकरार है। देशभर में कुछ लोग पुरानी मान्यता के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाते हैं तो कुछ 15 जनवरी को मनाते हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन दोनों में से कौन सी तिथि सही है। वहीं वैज्ञानिक मतों के अनुसार करीब 1700 साल पहले मकर संक्रांति 22 दिसंबर को मनाई जाती थी।

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पंडित चंद्रशेखर शर्मा बताते हैं कि मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य धनु राशि से मकर में प्रवेश करता है। इसलिए राशि के साथ ही सूर्य की दिशा में भी परिवर्तन हो जाता है और ये दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश कर जाता है। पंडित शर्मा कहते हैं कि हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन से खरमास का समापन होता है। इस तरह विवाह आदि शुभ कार्य भी शुरू हो जाते हैं। इसलिए हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। वे कहते हैं कि शास्त्रों में सूर्य के उत्तरायण काल में ही शुभ कार्य किए जाते हैं। सूर्य जब मकर, कुंभ, वृष, मीन, मेष और मिथुन राशि में रहता है, तब उसे उत्तरायण कहा जाता है। इस वजह से इसका राशियों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। इस वर्ष राशियों में ये बदलाव 14 जनवरी की देर रात को होगा। इसलिए इस बार मकर संक्रांति भी 15 जनवरी को ही मनार्इ जाएगी।

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1700 साल पहले दिसंबर में मनाने थे

बता दें कि मकर संक्रांति के आध्यात्मिक महत्व के साथ ही इसका वैज्ञानिक आधार भी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए 72 से 90 सालों में एक अंश पीछे रह जाती है। इससे सूर्य मकर राशि में एक दिन की देरी से प्रवेश करता है। इसी कारण करीब 1700 साल पहले मकर संक्रांति दिसंबर माह की 22 तारीख को मनाई जाती थी। बता दें कि मकर संक्रांति का समय 80 से 100 सालों में एक दिन आगे बढ़ जाता है। सूर्य के मकर राशि में जाने में होने वाली इस देरी की वजह से अब मकर संक्रांति दिसंबर के स्थान पर जनवरी में मनार्इ जाने लगी है। बताया जाता है कि 19वीं शताब्दी में भी मकर संक्रांति की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी थी। उस समय 13 जनवरी और 14 जनवरी को मकर संक्रांति की तिथि को लेकर असमंजस बना रहता था।

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2030 के बाद मनार्इ जाएगी 16 जनवरी को

शास्त्रों आैर वैज्ञानिकों की मानें तो मकर संक्रांति की तिथि को लेकर 2015 से शुरू हुर्इ असमंजस की यह स्थिति 2030 तक इसी तरह बरकरार रहेगी। इसकी वजह भी सूर्य आधारित कैलेंडर ही है। इसमें लीप ईयर का भी अहम योगदान है। हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का समय थोड़ा-थोड़ा बढ़ जाता है। 2030 के बाद तीन साल 15 जनवरी और एक साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। फिर मकर संक्रांति की स्थाई तिथि 15 जनवरी हो जाएगी। इसी तरह कई सालों बाद मकर संक्रांति की तिथि 16 जनवरी और फिर एक-एक दिन आगे बढ़ती रहेगी।

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