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पत्रिका असरः आधी ठंड बीतने के बाद प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को मिले स्वेटर

आधी सर्दी बीत जाने के बाद ठंड से ठिठुरते बच्चों को रविवार को बांटे गए स्वेटर
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नोएडा

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Iftekhar Ahmed

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Updated: 14 Jan 2018, 6:33 PM IST

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नोएडा. सरकारी प्राथमिक स्कूलों में आधी सर्दी बीत जाने के बाद ठंड से ठिठुरते बच्चों को रविवार को स्वेटर बांटे गए। ठंड में ठिठुरकर स्कूलों में पढ़ार्इ करने वाले बच्चों के चेहरे स्वेटर पाने के बाद खिल उठे। दरअसल, प्रदेश सरकार ने इसी सत्र से सरकारी प्रइमरी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को स्वेटर देने का वादा किया था, लेकिन दिसंबर माह बीत जाने के बाद भी सरकार बच्चों को स्वेटर नहीं दे पाई थी। सरकार की लेटलतीफी की वजह से देश के भविष्य इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी बिना स्वेटर के ही स्कूल जाने को मजबूर थे। बच्चों की परेशानी को देखते हुए पत्रिका डॉट कॉम ने इस मुद्दे को अभियान बनाते हुए खबरें प्रकाशित करनी शुरू कर दी थी। पत्रिका के इस अभियान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार बैकफुट पर आई और अपनी योजना को बदलते हुए जिलों में तैनात बीएसए को जल्द से जल्द स्थानीय स्तर पर ही स्वेटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, जिस पर अमल करते हुए गौतमबुद्ध नगर जिले में रविवार को अफसरों ने बच्चों को स्वेटर बांट दिए।

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बिसरख ब्लॉक के प्राइमरी स्कूलों में बांटे गए स्वेटर

सूचना अधिकारी राकेश चौहान ने बताया कि सरकार की ओर से स्वेटर के लिए निर्धारित की गर्इ राशी स्कूल टीचर्स को सौंपी गर्इ थी। इसी से उन्होंने बच्चों को स्वेटर बांटे हैं। स्कूलों में स्वेटर बांटने की प्रक्रिया शुरू हो गर्इ है। जल्द ही जिले के सभी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को स्वेटर बांट दिए जाएंगे। शनिवार और रविवार को मोरना, छलेरा, समेत बिसरख ब्लॉक के ज्यादातर प्राइमरी स्कूलों में स्वेटर बांट दिए गए हैं। बाकी बचे स्कूलों में अगले एक से दो दिनों में बच्चों को स्वेटर बांट दिए जाएंगे।

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ये बनी स्वेटर बटने में देरी की वजह

योगी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद यूपी के प्राइमरी स्कूलों का कायाकल्प करने के साथ ही इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सभी जरूरी सामान मुहैया कराने का वादा किया था। इसी वादे के तहत इस सत्र से सरकार ने बच्चों को स्वेटर भी उपलब्ध कराने का वादा किया था। इसके लिए पहले यूपी सरकार ने प्रत्येक जिले को खुद ही स्वेटर खरीदने की जिम्मेदारी दी थी। इस पर अमल करते हुए स्कूलों ने अपने प्रपोजल जब शासन को भेजे, तो उसमें दाम को लेकर काफी भिन्नताएं थी।

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सरकार एक स्वेटर पर 200 रुपए से ज्यादा खर्च करने को तैयार नहीं थी। लेकिन, कई स्कूलों के प्रपोजल में यह दाम काफी ऊंचा था। इसके बाद सरकार ने खुद ई-टेंडरिंग के जरिए स्कूलों में स्वेटर मुहैया कराने की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए 20 दिसंबर 2017 की डेडलाइन तय की गई। लेकिन, इस पर कोई काम नहीं हो सका। बाद में सरकार ने 25 दिसंबर 2017 की दूसरी डेडलाइन तय की थी, लेकिन इस डेड लाइन के दो हफ्ते बाद सरकार से मिले स्वेटर बच्चों के बदन पर आ पाए हैं।

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तेटलतीफी पर परिजनों ने जताई नाराजगी
बच्चों को भले ही अधिकारियों ने स्वाटर बांट दिए हो, लेकिन बच्चों के परिजन सरकार की इस लेटलतीफी से खुश नहीं है। उनका कहना है कि आधे से ज्यादा सर्दी का मौसम ठिठुरते हुए बच्चों ने बिताया। अब इन स्वेटरर्स का क्या फायदा।

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