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जम्‍मू-कश्‍मीर में पत्‍थरबाजों पर चलती है यह गन, अब यूपी में दंगाइयों पर चलेंगी इससे गा‍ेलियां

मेरठ में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की 108 बटालियन को मिल चुके हैं दो हथियार

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नोएडा। 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के बाद उत्‍तर प्रदेश में दो नए हथियारों ने अपनी जगह बना ली है। खास बात यह है कि इनमें से एक हथियार का इस्‍तेमाल जम्‍मू-कश्‍मीर में किया जाता है। वहां पत्‍थरबाजों को भगाने के लिए इसका प्रयोग होता है। अब यूपी में दंगाइयों से निपटने के लिए सुरक्षा बल इसका उपयोग करेगा। ये हथियार मेरठ में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की 108 बटालियन को मिल चुके हैं। द्वितीय कमान अधिकारी आरएएफ मेरठ योगेश कुमार सिंह का कहना है कि उपद्रव‍ियों से निपटने के लिए उनके पास मल्टी सेल लांचर (एमएसएल) और 12 बोर पंप एक्शन गन आ चुकी है। इससे उपद्रवियों से निपटने में आसानी होगी।

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कई बार बिगड़ा माहौल

उत्‍तर प्रदेश में हाल ही में कई बार माहौल बिगड़ा। कासगंज, फिरोजाबाद अौर मेरठ की हिंसा को देखते हुए आरएएफ की ताकत को बढ़ाने की जरूरत पड़ी। इतना ही नहीं मुजफ्फरनगर दंगों व हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को देखते हुए भी हथियारों में बढ़ोतरी की गई। बताया जा रहा है कि इन हथियारों को जरिए दंगाइयों या उपद्रवियों को उल्‍टे पांव वापस भगा दिया जाएगा। मेरठ आरएएफ को 50 पंप एक्शन गन और 25 एमएसएल मिली हैं। आपको यह भी बता दें कि अभी तक ये हथियार केवल दिल्ली की 103 और मेरठ की 108 बटालियन को ही मिले हैं।

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खासियत

112 बोर पंप एक्शन गन में ट्यूबर मैग्जीन यूज होती है। इसकी मारक क्षमता 100-150 मीटर तक होती है। इसमें शॉट नंबर-9 व शॉट नंबर-10 (छर्रे) चलते हैं। अधिकारियों के अनुसार, इसका इस्‍तेमाल जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजों को काबू करने के लिए किया जाता है।

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मधुमक्‍खी के काटने जैसा होगा दर्द

138 एमएम मल्टी सेल लांचर (एमएसएल) में छह रिवॉल्विंग चैंबर होते हैं। इसमें छह तरह के सेल एक साथ चल सकते हैं। इसका वजन 4.7 किग्रा है और इसकी लंबाई 58 सेमी. है। इसमें टियर स्मॉग वाले छह सेल निकलते हैं। इससे आंखों में जलन, बेचैनी, नाक बहना अौर बदन जलने जैसी समस्‍या आती है। इसमें एक स्टिंगर सेल भी होता है, जिसके हमले से मधुमक्खी के काटने जैसा दर्द होता है।

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