
मेरठ. सोमवार यानी आज भारतीय शास्त्रों के अनुसार ऐसा संयोग बन रहा है, जिसमें पूजा करने मात्र से ही पितृदोष और कालसर्प दोष के कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। पंडित कैलाश नाथ द्विवेदी के अनुसार इस साल सोमवती अमावस्या पर सूर्य-चंद्रमा मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में रहेंगे। बैसाख मास और अश्विनी नक्षत्र का ये संयोग 17 साल बाद बन रहा है। इसके बाद ऐसा शुभ संयोग 10 साल बाद 24 अप्रैल 2028 को बनेगा। सात्विक और देवगण वाले इस नक्षत्र के साथ सोमवार और अमावस्या के साथ सर्वार्थसिद्ध? योग ग का संयोग बनने से ये दिन पितृ पूजा, पितृ दोष और कालसर्प दोष की शांति के लिए खास हो गया है। इस शुभ संयोग में आप धन की प्राप्ति के साथ जीवन की बाधाओं को भी दूर कर सकते हैं।
पंडित द्विवेदी ने बताया कि हिन्दू धर्म में इस अमावस्या को बहुत खास माना गया है। विवाहित स्त्रियां इस दिन अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत करती हैं। पुराणों में लिखा है इस दिन मौन (बिना किसी से बात किए) व्रत करने से सहस्र गोदान (हजारों गायों के दान) का फल मिलता है। बता दें कि सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
पुराणों में है अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत का महत्व
पुराणों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत नाम से भी बताया गया है। अश्वत्थ यानि पीपल का पेड़। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के पेड़ की दूध, जल, फूल, चावल और चंदन से पूजा की जाती है। फिर पेड़ के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा की जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी बहुत महत्व होता है।
पितरों की तिथि है आमावस्या
पंडित जी बताते हैं कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर से कहा था कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य हर तरह से सुखी और स्वस्थ रहेगा। अमावस्या पित्र की तिथि है। इसलिए ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों को शांति मिलती है। निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार इस दिन मौन रहकर स्नान, पूजा-पाठ, दान और व्रत करने से बड़े से बड़े पाप से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही हजारों गायों के दान के जितना पुण्य फल मिलता है। बैसाख महीने की इस अमावस्या पर 7 पवित्र नदियों, गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी में से किसी भी एक नदी में नहाने से ही हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।
अमावस्या के दिन न करें कोई शुभ कार्य
अमावस्या की रात चंद्र दिखाई नहीं देता है और इस तिथि के स्वामी पित्र देवता होते हैं। इसलिए इस तिथि पर कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। अन्यथा परेशानियां आ सकती हैं और असफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इस तिथि पर मजदूर लोग भी काम बंद रखते हैं।
अमावस्या पर मन रहता है असंतुलित
ग्रंथों में अमावस्या पर यात्रा करने से भी मना किया गया है। इस संबंध में मान्यता है कि अमावस्या पर चंद्र की शक्ति बिल्कुल कम हो जाती है। ज्योतिष में चंद्र को मन का कारक बताया गया है। अमावस्या पर चंद्र न दिखने की वजह से हमारा मन संतुलित नहीं रह पाता है। इसी वजह से काफी लोग अमावस्या पर असहज महसूस करते हैं।
अमावस्या पर कोई बड़ा फैसला लेने से बचें
अमावस्या पर हमारा मन संतुलित नहीं रह पाता है। इस कारण कोई भी बड़ा फैसला इस दिन लेने से बचना चाहिए। अन्यथा फैसला गलत साबित हो सकता है और हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सोमवार और अमावस्या के योग में करें ये उपाय
पंडित द्विवेदी बताते हैं कि सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। चंद्र के लिए दूध का दान किसी गरीब को करें। पितरों के लिए तर्पण करें। घर में पितरों के लिए धूप दीप दें। साथ ही काले तिल का भी दान करें।
Updated on:
16 Apr 2018 01:21 pm
Published on:
15 Apr 2018 11:18 am
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