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विवेक तिवारी मर्डर से पहले भी पुलिस कर चुकी है ये हत्याकांड, नाराज हुए थे तत्कालीन PM अटल बिहारी वाजपेयी

996 में मेरठ का चर्चित गोपाल माहेश्वारी एनकाउंटर भी फर्जी साबित हुआ था। पुलिस का कहना था कि गोपाल ने एक सिपाही की हत्या कर उसे लूटा था।
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नोएडा

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Rahul Chauhan

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Updated: 30 Sep 2018, 10:46 AM IST

मेरठ। पुलिस पर लखनऊ के विवेक तिवारी की हत्या का दाग नया नहीं हैं। 18 साल पहले मेरठ में भी एक बीएससी की छात्रा की पुलिस ने इसी तरह गोली मारकर हत्या कर दी थी। जानकारी के मुताबिक तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी इस हत्याकांड से काफी नाराज हुए थे। उन्होंने खुद घटना का संज्ञान लेकर सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। जिसेक बाद पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और इंस्पेक्टर को जेल भेजा गया था।

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रीता भादुड़ी केस
18 साल पहले साल 2000 में मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के जंगल में बीएससी की छात्रा अपने सहपाठी के साथ कार में बैठी बात कर रही थी। कार को पुलिस ने घेर लिया। दोनों को बाहर आने के लिए कहा। पुलिस से डर कर लड़के ने कार को जंगल में दौड़ा दिया। सिपाहियों ने कार में बदमाश होने की सूचना वायरलेस पर दी। इंस्पेक्टर दौराला अरुण शुक्ला ने मौके पर पहुंचकर कार पर गोलियां बरसा दीं। मौके पर छात्रा रीता भादुड़ी की मौत हो गई। पुलिस ने एनकाउंटर का दावा किया, लेकिन पुलिस पर तमाम सवाल उठने लगे। मामला बढ़ने पर खुद तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने इस कांड पर दुख जताया। सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद इंस्पेक्टर अरुण शुक्ला और दूसरे पुलिस वालों पर एफआईआर दर्ज की गई और सभी को जेल जाना पड़ा था।

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गोपाल माहेश्वरी केस
1996 में मेरठ का चर्चित गोपाल माहेश्वारी एनकाउंटर भी फर्जी साबित हुआ था। पुलिस का कहना था कि गोपाल ने एक सिपाही की हत्या कर उसे लूटा था। बाद में खुलासा हुआ था कि मेरठ का गोपाल कासगंज में रहने लगा था। पुलिस ने उसे वहां से उठाया था। इसकी लिखापढ़ी कासगंज थाने में कर दी। मेरठ में लाकर उसे मार दिया। कासगंज थाने के अभिलेख पुलिस के लिए काल साबित हुए। इस मामले में सीबीआई जांच हुई। दो इंस्पेक्टर रामकेर सिंह, ओमपाल सिंह, तीन एसओ अविनाश मिश्रा, श्यामलाल कश्यप, महेश चौहान, संजय त्यागी आदि कुल आठ को जेल भेजा गया था।

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वकील सत्यपाल केस
साल 2006 में मेरठ के मेडिकल थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर में एक वकील के घर पर बदमाश के छिपे होने की सूचना पर पुलिस ने दबिश दी। बदमाश नहीं मिला, लेकिन वकील सतपाल मलिक को गोली मार दी गई। उसकी मौत हो गई। आरोप लगा कि वकील के मरने पर पुलिस ने अपने एक सिपाही को मार डाला। इस मामले ने काफी तूल पकड़ा। तत्कालीन एसओ मेडिकल राजेंद्र यादव समेत दूसरे पुलिस वालों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेजा गया। उस वक्त यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था।