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PATRIKA PODCAST : दृष्टि रहे वर्तमान पर

जीवन सुख और दु:ख, हानि-लाभ, जीवन-मृत्यु, यश-अपयश जैसे द्वंद्व भावों का ही सम्मिलित स्वरूप है। चक्र के आरे की तरह यह संसार दशाएं निरन्तर परिवर्तित होती रहती हैं।
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भारत

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Shaily Sharma

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Oct 16, 2026

patrika podcast

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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : कर्म की निरंतरता और आशावादी दृष्टिकोण से सुख, समृद्धि, सफलता और सकरात्मकता जीवन में आने लगती है। जैसी हमारी सोच होती है वैसा ही हमारा जीवन बनता है। विषम परिस्थितियां शिक्षक का काम करती हैं। उनमें तप कर हम सोना बनते हैं। अत: इन परिस्थितियों में विचलित नहीं होना चाहिए।