
नीति आयोग की शिक्षा को लेकर जारी रिपोर्ट में बेटियों के प्राइमरी स्कूल से हायर सेकंडरी स्कूल तक के जो तथ्य सामने आए हैं, वो काफी चौंकाने वाले हैं। इस रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया है कि बेटियों को शिक्षा में बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में प्राइमरी स्कूल में उनका सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। प्राइमरी लेवल पर 2024-25 में देश में लड़कियों का नामांकन का राष्ट्रीय औसत जहां 92.3 प्रतिशत था, वहीं छत्तीसगढ़ में यह उससे कम था यानी 89.9 प्रतिशत था। इसी तरह के आंकड़े हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल के भी हैं। हाईस्कूल स्तर पर भी छत्तीसगढ़ निचले पायदान पर है, तो हायर सेकंडरी स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। यह हम नहीं, रिपोर्ट कह रही है। जहां एक ओर विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेटियां परचम फहरा रही हैं, वहीं दूसरी ओर यह तस्वीर भी है।
नीति आयोग के जीईआर के ये आंकड़े, केवल एक रिपोर्ट के आंकड़े भर नहीं हैं; बल्कि यह उस तथ्य को सामने लाते हैं कि 10 में से 4 बेटियां अभी भी प्राथमिक शिक्षा से दूर हैं। यह स्थिति काफी चिंताजनक इसलिए है कि सरकार बेटियों को शिक्षा देने के लिए पूरा जोर लगा रही है। बेटियों को पढ़ाने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके तहत बेटियों को निशुल्क शिक्षा के साथ ही साथ निशुल्क पाठ्यपुस्तक व पाठ्य सामग्री, स्कूल तक आने-जाने के लिए साइकिल, मध्याह्न भोजन, गणवेश, स्कालरशिप और परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर प्रोत्साहन राशि भी।
सब होने के बावजूद भी अगर औसतन चार लड़कियां प्राथमिक शिक्षा से दूर है, तो इस पर गंभीरता से मंथन करने की जरूरत है। सभी लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा मिले, इसके लिए समन्वित प्रयास करने होंगे, खासकर के ग्रामीण इलाकों और शहरों के झुग्गी-झोपड़ी वाले क्षेत्रों में। साथ ही स्कूलों में बेटियों के लिए मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होगी।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
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Published on:
26 Jun 2026 02:58 am
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