स्त्री का शरीर सौम्य है, अतएव वह स्त्री है। एवं इस भूताग्नि, भूतसोम से सम्बद्ध शरीरों की दृष्टि से पुरुष को पुरुष कहना, स्त्री को स्त्री कहना यथार्थ है। प्रतिष्ठाग्नि तथा प्रतिष्ठासोम की दृष्टि से जब विचार किया जाता है, तो पुरुष वास्तव में स्त्री है, एवं स्त्री वास्तव में पुरुष है। पुरुष के आग्नेय शरीर की प्रतिष्ठा शुक्र माना गया है। शुक्रसत्ता ही पुरुष सत्ता का कारण है। शुक्र सौम्य है। सौम्य स्त्रीतत्त्व शुक्ररूप से पुरुष की प्रतिष्ठा है, आग्नेय पुरुष के सौम्यशुक्र, तथा सौम्या स्त्री के आग्नेय शोणित के समन्वय से ही गर्भस्थिति होती है। 'स्त्रिय: सतीस्तां उ में पुंस आहु:।Ó