
'सतलुज' हटने के बाद Diljit Dosanjh का दो टूक बयान। (फोटो सोर्स: diljitdosanjh)
Diljit Dosanjh on Satluj: दिलजीत दोसांझ की मच अवेटेड फिल्म 'सतलुज' 3 जुलाई को ZEE5 इंडिया पर आई, लेकिन दो दिन बाद ही इसे हटा दिया गया, जिससे कई दर्शक हैरान रह गए। अब, फिल्म के लीड एक्टर ने आखिरकार इस विवाद पर बात की है। फैंस के साथ एक लाइवस्ट्रीम के दौरान, एक्टर ने बताया कि टीम को शुरू से ही इस बात का अंदाजा था, इसलिए उन्होंने रिलीज से पहले फिल्म का प्रमोशन नहीं किया। उन्होंने ये भी कहा कि 'सतलुज' को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए सालों तक लड़ने के बावजूद, उन्होंने कभी बॉलीवुड या पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से मदद नहीं मांगी।
सोमवार को एक लाइव सेशन के दौरान, दिलजीत दोसांझ ने बताया कि टीम ने जानबूझकर 'सतलुज' का प्रमोशन नहीं किया क्योंकि उन्हें डर था कि अगर पहले से घोषणा की गई तो शायद ये कभी दर्शकों तक नहीं पहुंच पाएगी। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र मकसद इस बात को पक्का करना था कि जसवंत सिंह खालरा की कहानी लोगों तक पहुंचे, भले ही कुछ समय के लिए ही सही।
इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि फिल्म की रिलीज के लिए सालों तक चले संघर्ष के दौरान मेकर्स ने कभी पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री या बॉलीवुड से मदद नहीं मांगी। दिलजीत दोसांझ ने पंजाबी में कहा, जिसका हिंदी मतलब कुछ इस प्रकार है, "हम पिछले तीन-चार सालों से इस फिल्म को रिलीज कराने के लिए लड़ रहे हैं। हम कभी किसी के पास मदद मांगने नहीं गए। मैंने अपनी इंडस्ट्री या बॉलीवुड में कभी किसी से हमारी फिल्म रिलीज करने, हमारा साथ देने या हमारे साथ खड़े होने के लिए नहीं कहा। हमने यह लड़ाई खुद लड़ी।"
आगे बात करते हुए उन्होंने कहा कि हर कोई अपनी-अपनी लड़ाई लड़ रहा है, और उनकी टीम के लिए सबसे बड़ी जीत फिल्म का दर्शकों तक पहुंचना था। "हर किसी को लगता है कि उनका संघर्ष सबसे बड़ा है। आप चाहे किसी भी काम में हों, हर कोई अपने प्लेटफॉर्म पर अपनी लड़ाई लड़ रहा है। हमने भी अपनी फिल्म को खुद दर्शकों तक पहुंचाया, रिलीज कराया और सुनिश्चित किया कि ये लोगों तक पहुंचे।"
लाइवस्ट्रीम के दौरान, दिलजीत दोसांझ ने एक कड़ा संदेश देते हुए कहा, "आप मुझे जितना चाहें उतना परेशान कर सकते हैं। मैं मरने के दिन तक पंजाब के साथ हूं।" एक्टर ने कहा कि उन्हें अब सुकून है क्योंकि फिल्म दर्शकों तक पहुंच गई है, भले ही कुछ समय के लिए ही सही। उनके मुताबिक, कई दर्शकों ने 'सतलुज' को डाउनलोड कर लिया है, जिससे ये बात तो पक्की है कि फिल्म का मैसेज आगे भी लोगों तक पहुंचता रहेगा।
उन्होंने कहा, "मैं इससे बहुत खुश हूं। भगवान का शुक्र है। मैं सभी का शुक्रिया अदा करता हूं और पूरी टीम को बधाई देता हूं क्योंकि हमारा काम, जो हम कहना चाहते थे और जिस तरह से कहना चाहते थे, वो लोगों तक बिल्कुल उसी तरह पहुंचा है। अब ये आपकी फिल्म है, अब इसे रोका नहीं जा सकता। मुझे लगता है कि जो लोग इसके पीछे हैं, वो नासमझ या अनजान हैं कि अगर कोई चीज ऑनलाइन आ जाती है, तो उसे बस ऐसे ही डिलीट नहीं किया जा सकता।"
ZEE5 इंडिया पर कुछ समय के लिए जो 'सतलुज' दिखाई गई थी, प्लेटफॉर्म से फिल्म हटाने के बाद, Team ने एक बयान जारी करके फिल्म और उसके मेकर्स के लिए अपना सपोर्ट दोहराया। रविवार को जारी बयान में कहा गया, "रिलीज के बाद से 'सतलुज' को जो रिस्पॉन्स मिला है, वो वाकई जबरदस्त रहा है। हम हर उस दर्शक के बहुत आभारी हैं जिसने फिल्म को सब्सक्राइब किया, देखा और उसे सपोर्ट किया… ZEE5 में, हम 'सतलुज' के साथ मजबूती से खड़े हैं। हमारा मानना है कि दमदार कहानी कहने की कला में लोगों को प्रेरित करने, लंबे समय तक याद रहने और गहरा असर छोड़ने की ताकत होती है।"
इसके साथ ही Zee5 की टीम ने इस बात की भी पुष्टि की कि फिल्म अभी भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी। “मौजूदा हालात को देखते हुए, 'सतलुज' फिल्म भारत में अगली सूचना तक उपलब्ध नहीं होगी। हम सही प्रक्रिया अपनाकर हर उचित तरीका आजमाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि जल्द से जल्द इस फ़िल्म को अपने दर्शकों तक वापस लाया जा सके।”
हनी त्रेहान के डायरेक्शन में बनी फिल्म 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की कहानी पर आधारित है। खालरा ने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौर में हजारों सिख युवाओं के कथित तौर पर गायब होने का मामले का खुलासा किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरे राज्य के श्मशान घाटों के रिकॉर्ड की जांच करके, खालरा को ऐसे सबूत मिले जिनसे कथित गैर-कानूनी अंतिम संस्कार और फर्जी मुठभेड़ों का पता चला, और इस मुद्दे पर दुनिया का ध्यान गया।
6 सितंबर 1995 को, खालरा का अमृतसर के कबीर पार्क स्थित उनके घर के बाहर से अपहरण कर लिया गया था। आरोप है कि उन्हें प्रताड़ित किया गया और मार डाला गया, और माना जाता है कि उनके शव को हरिके नहर में फेंक दिया गया था। 2005 में पटियाला की एक अदालत ने इस मामले में पंजाब पुलिस के कई अधिकारियों को दोषी ठहराया था। बाद में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उन दोषियों की सजा को बरकरार रखा और उसे बढ़ाकर आजीवन कारावास कर दिया।
Updated on:
06 Jul 2026 05:21 pm
Published on:
06 Jul 2026 05:21 pm
