3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पाली के खार्चिया की चर्चा अफ्रीका में

जोधपुर

•

image

Rajendra Singh Denok

•

Updated: 30 Nov 2016, 10:59 AM IST

पाली. पाली के खार्चिया गेहूं का नाम पर विश्वभर में पहचाना जा रहा है। खार्चिया को यह पहचान केवीके के अध्यक्ष डॉ. धीरजसिंह ने दिलवाई है। धीरजसिंह ने बताया कि 24 से 26 नवंबर तक अफ्रीका के इथियोपिया में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में केवीके अध्यक्ष डॉ. धीरजसिंह ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बताया कि अफ्रीका में खाद्य प्रणाली में बदलाव, कृषि पारिस्थितिकी, खाद्य संप्रभुता और पोषण व स्वास्थ्य में उनकी भूमिका अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में 32 देशों के 272 कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

- महिला ने कराया छेड़छाड़ का मामला दर्ज, समाज ने कहा झूठी हैं महिला

इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत से एकमात्र डॉ. धीरजसिंह ने ही इस सम्मेलन में भाग लिया। डॉ.सिंह ने इस सम्मेलन में सीड विलेज कार्यक्रम, छोटे किसानों के लिए खाद्य संप्रभुता के लिए लिए नवीन दृष्टिकोण विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने सम्मेलन में छोटे और सीमांत किसानों को फसल उत्पादन के लिए अपने स्वयं के बचाए बीज के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कृषक गेहूं, जौ, सरसों तथा जीरा की अच्छी गुणवत्ता का बीज खरीदकर अपने छोटे-छोटे खेतों में लगाता है तथा फसल पकने पर उसका चौथाई भाग अगले वर्ष के लिए रखता है। इस तरह से कृषक समुदाय ने उन्नत बीजों को आगे से आगे उपयोग कर एक नई व बेहतर किस्म तैयार कर दी।

सम्मेलन में खार्चिया पर हुई चर्चा

इस सम्मेलन में डॉ. धीरज सिंह ने खारची कृषक समुदाय की पीढि़यों द्वारा संरक्षित की गई खार्चिया गेहूं पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंनेे बताया कि खार्चिया अपने विशिष्ठ गुणों के कारण आज उसके जीन की महत्वता हर फसल के लिए की जा रही है। डॉ. सिंह के इस व्याख्यान के बाद अन्य देशों के वैज्ञानिकों ने पर खार्चिया पर अपना जिक्र किया।

ग्रामीणों ने किया स्वागत

अफ्रीका सम्मेलन में भाग लेकर मंगलवार को डॉ.धीरजसिंह के लौटने पर खारड़ा गांव के कृषकों ने राममटीला से समीप उनका स्वागत किया। कृषकों ने डॉ.सिंह का माला व साफा पहला कर स्वागत किया। इस दौरासन देदाराम पटेल, लक्ष्मणसिंह व मांगीलाल सहित कई कास्तकार मौजूद थे।