
यहां जीत-हार नाक का सवाल
पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध जवाई का नाम सामने आते ही सुमेरपुर की याद खुद ब खुद आ जाती है। इसकी वजह भी है। कभी जोधपुर जिले की प्यास बुझाता था। अब पाली जिले की अधिकांश तहसीलों में जवाई का पानी पहुंचाने का जतन किया जा रहा है। रियासतकाल में बने जवाई बांध पर सियासत अक्सर गर्माती रही है। चाहे मुद्दा पेयजल का हो या वोटों का, जवाई बांध अक्सर सुर्खियों में रहा है। जवाई की कहानी इन चुनावों में चर्चा में बनी हुई है। यह मतदाताओं के मानस-पटल पर कितना प्रभाव डालेगी, यह चुनाव परिणाम ही बताएंगे।
राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली. किसान बहुसंख्यक सुमेरपुर विधानसभा सीट से सिर्फ नए चेहरों के राजनीतिक जीवन का ही प्रश्न नहीं जुड़ा है, बल्कि यहां कई सियासी हस्तियों की प्रतिष्ठा भी दावं पर है। कांग्रेस की रंजू रामावत और भाजपा के जोराराम कुमावत का टिकट दोनों ही दलों के राष्ट्रीय नेतृत्व की सिफारिश पर तय हुआ था। ऐसे में अब सवाल यह है कि कौनसा चेहरा अपना राजनीतिक भविष्य और राष्ट्रीय नेतृत्व की प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब होगा। चुनाव में दो दिन शेष है। मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
टिकट वितरण में सुमेरपुर सीट पर भाजपा (BJP) व कांग्रेस (Congress) प्रत्याशियों के नाम भी चौंकाने वाले रहे थे। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और चार बार की विधायक रही बीना काक का टिकट काटकर रंजू रामावत को विकल्प के रूप में मैदान में उतारा। जबकि भाजपा ने दो बार विधायक रहे मदन राठौड़ को बदलकर सुमेरपुर के पालिका अध्यक्ष जोराराम कुमावत पर दावं खेलना मुनासिब समझा। केन्द्रीय नेतृत्व की सिफारिश पर पहली बार विधायकी के लिए राजनीतिक पारी खेल रहे दोनों चेहरे अपनी-अपनी साख बचाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। दोनों में सीधा मुकाबला है। रामावत के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सुमेरपुर में सभा कर चुके हैं तो कुमावत को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बुधवार को सुमेरपुर में होने वाली सभा से वैतरणी पार होने की उम्मीद है। भाजपा प्रत्याशी पार्टी के परम्परागत मतों के अलावा ओबीसी वोटबैंक के सहारे समीकरण अपने पक्ष में करने में लगे हैं। भाजपा को यहां भितरघात का भी खतरा है। परम्परागत वोट बैंक साथ रहा तो कांग्रेस प्रत्याशी भी करिश्मा कर सकती है।
मुद्दे गौण, सियासत भारी
सियासत की नजर भले ही न पड़ी हो, लेकिन विधानसभा क्षेत्र में आजन से जुड़ी समस्याएं-जरूरतें कम नहीं है। जवाई पुनर्भरण का मसला हर चुनाव में सुर्खियां बटोरता है। पिछले दो चुनावों में जवाई के नाम पर भी अच्छे-खासे वोट बटोरे गए। मौजूदा सरकार जवाई पुनर्भरण पर कई दावे-वादे करती रही है लेकिन हकीकत से वास्ता अब भी दूर है। सुमेरपुर कृषि बहुल क्षेत्र माना जाता है। यहां की मण्डी प्रदेशभर में प्रसिद्ध है। किसानों की अनगिनत समस्याएं मुंह बाएं खड़ी है। सुमेरपुर में ट्रांसपोर्ट नगर बसाने पर भी सियासत ने कभी विचार नहीं किया। यातायात की समस्या से शहर रोजाना जूझ रहा है। ग्रामीण इलाकों में पेयजल की उपलब्धता का मुद्दा अब भी मृगतृष्णा ही नजर आ रहा है।
प्रत्याशी का हाल क्या है?
जोराराम कुमावत, भाजपा
ताकत: मजबूत जातिगत समीकरण, संगठन की सक्रियता, पार्टी के बड़े चेहरों का सहयोग
कमजोरी: नए चेहरा, भितरघात की आशंका
रंजू रामावत, कांग्रेस
ताकत: युवा और महिला चेहरा, पार्टी का मजबूत वोट बैंक
कमजोरी: नया चेहरा, स्थानीय संगठन का मन से जुड़ाव नहीं
अनुमानित जातिगत गणित
जाट -1100
सीरवी -18000
घांची -27000
माली -5000
कुम्हार -19000
पटेल -6000
देवासी -18000
भोमिया -22000
ब्राह्मण -7000
राजपूत -21000
राजपुरोहित -11000
एससी -40000
एसटी -38000
जैन -5500
जणवा -3500
अन्य -30000
तीन बार से ये विधायक
2003 - मदन राठौड़, भाजपा
2008 - बीना काक, कांग्रेस
2013 - मदन राठौड़, भाजपा
Updated on:
05 Dec 2018 12:27 pm
Published on:
05 Dec 2018 11:43 am
