इस मामले में सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला कलक्टर, चेयरमैन व सहायक निदेशक महिला अधिकारिता विभाग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। यह आदेश डॉ. जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने याचिकाकर्ताओं खैरुनिशा व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई में दिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता नरपतसिंह चारण ने कहा कि एक ओर सरकार महिला सशक्तीकरण अभियान चला रही है। दूसरी ओर गांवों में जच्चा-बच्चा कुपोषण की समस्याओं के चलते नौनिहालों की मृत्युदर बढ़ती जा रही है। सरकार इस तरह के प्रोजेक्ट को बंद कर सिर्फ एक ही जिले के की 150 ग्राम पंचायतों में छह वर्ष से संतोषप्रद रूप से कार्यरत महिला ग्राम समन्वयकों को सेवा से पृथक कर रही है। यह आश्चर्यजनक है। वहीं विधि विरुद्ध व मनमाना, महिला सशक्तीकरण के विरुद्ध तथा प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध भी है, क्योंकि इनको हटाने से पहले किसी का पक्ष तक नहीं जाना गया।