
भरत तिवारी (फोटो- bharat tiwari facebook)
Bharat Bhushan Tiwari Encounter: 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि 12 जून से ही बननी शुरू हो गई थी। आरोप है कि भरत भूषण तिवारी ने सरकारी योजनाओं और फंड में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की थी। हालांकि, वह इससे पहले भी गांव की विभिन्न समस्याओं को लेकर लोगों की आवाज बनने का प्रयास करता रहा था। 12 जून को वह अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचा, लेकिन वहां उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। इसके बाद वह अपनी बात लेकर डीएसपी के पास पहुंचा। आरोप है कि डीएसपी ने भी उसकी शिकायत लेने से इनकार कर दिया, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। सूत्रों का कहना है कि डीएसपी ऑफिस का विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और अंततः घटनाक्रम पुलिस मुठभेड़ तक पहुंच गया।
बेलौटी गांव के लोगों का आरोप है कि डीएसपी कार्यालय में न केवल भरत भूषण तिवारी की शिकायत नहीं सुनी गई, बल्कि उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें गालियां दी गईं और डीएसपी के अंगरक्षकों ने उनके साथ मारपीट की, जिससे वह काफी आक्रोशित हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, 12 जून को ही कुछ पुलिस अधिकारियों ने भरत भूषण तिवारी को उनके गांव में एनकाउंटर करने की धमकी दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि इसी घटना के बाद भरत और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया और सोशल मीडिया, विशेषकर फेसबुक, के माध्यम से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि गरीबों की जमीन पर मिट्टी भराई से जुड़े मामले में प्रशासन और ठेकेदारों के बीच कथित मिलीभगत थी, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही थी। उनका कहना है कि भरत भूषण तिवारी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे थे और प्रभावित लोगों की आवाज बनकर सामने आए थे। ग्रामीणों के मुताबिक, इसी वजह से वह कुछ अधिकारियों की नजर में खटकने लगे।
गांव के लोगों का कहना है कि डीएसपी की ओर से कथित एनकाउंटर की धमकी मिलने के बाद भरत भूषण तिवारी न केवल नाराज थे, बल्कि भयभीत भी हो गए थे। ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें आशंका थी कि पुलिस उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकती है। इसी डर के कारण उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए सोने का लॉकेट बेचकर एक पिस्टल खरीदी थी।
ग्रामीणों का दावा है कि इसके बाद भरत भूषण तिवारी अपने फेसबुक अकाउंट से लगातार लाइव आकर प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने लगे। उनका आरोप था कि स्थानीय अधिकारियों द्वारा गांव के लोगों की समस्याओं और शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी दौरान वह कई बार प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषकर एसडीएम, की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं देने लगे।
Updated on:
22 Jun 2026 09:32 am
Published on:
22 Jun 2026 08:02 am
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